Wednesday, October 14, 2026

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मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड (Meerut Drum Murder Case) में जिला अदालत ने आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। पूरी खबर पढ़ें।

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भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी (TI) रतन सिंह परिहार को 'जय जोहार' बोलने पर आदिवासी छात्रों को गाली देने और 'यहीं कूट दूंगा' की धमकी देने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सस्पेंड कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें।

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बन रहे गूगल के मेगा डेटा सेंटर पर 160 एकड़ जंगल काटने और जल संकट पैदा करने के आरोप लगे हैं, जिस पर कंपनी ने एयर-कूलिंग तकनीक की सफाई दी है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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दिल्ली की अदालत ने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रदर्शन और शांति बॉन्ड के उल्लंघन मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। पूरी खबर पढ़ें।
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NCERT Books Dispute 2026: चंदा मामा दूर के कविता पर विवाद, जानिए क्या है पूरा मामला

NCERT Books Controversy: जब बच्चों की किताबों पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को उठाना पड़ा सख्त कदम

नई दिल्ली: देश की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा संस्था NCERT एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला केवल इतिहास के अध्यायों को बदलने का नहीं है, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था और छोटे बच्चों की मर्यादा से जुड़ा है। हाल ही में दो ऐसे बड़े विवाद सामने आए हैं जिन्होंने देश की सर्वोच्च अदालतों को भी हैरान कर दिया। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी।

कक्षा 1 की कविता में अमर्यादित शब्द का बड़ा विवाद
यह मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कक्षा 1 के नन्हे बच्चों के लिए तैयार की गई हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक लोरी ‘चंदा मामा दूर के’ शामिल की गई है। आरोप है कि इस कविता की एक पंक्ति में एक बेहद अमर्यादित और अश्लील शब्द छप गया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोमित्र शंकर ने इसके खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। कोर्ट के चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव की बेंच ने इस मामले को महिलाओं के सम्मान और बच्चों की मानसिकता के लिए बेहद गंभीर माना है। अदालत ने केंद्र सरकार और NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का मामला
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी NCERT की एक नई किताब पर बेहद सख्त रुख अपनाया था। कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब ‘Exploring Society’ के एक अध्याय में बिना किसी ठोस संदर्भ या संतुलन के ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Judicial Corruption) का एक पूरा सेक्शन जोड़ दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट का मानना था कि 13-14 साल के बच्चों के मन में देश की न्याय प्रणाली के प्रति ऐसी नफरत भरना न्यायपालिका की छवि को खराब करने की कोशिश है।

अदालत का ब्लैंकेट बैन और NCERT की बिना शर्त माफी
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद इस विवादित किताब की छपाई, बिक्री और पीडीएफ शेयरिंग पर पूरी तरह से ‘ब्लैंकेट बैन’ लगा दिया गया था। मामला इतना गंभीर हो गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और NCERT को कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। सरकार ने तुरंत बाजार से लगभग 82 हजार से ज्यादा विवादित किताबें वापस मंगवाईं। इसके बाद विशेषज्ञों की एक कमेटी ने उस अध्याय को दोबारा संशोधित किया। सितंबर की शुरुआत में जब नई और सुधारी गई किताबें पेश की गईं, तब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को बंद किया।

क्यों खड़े हो रहे हैं NCERT की प्रूफ-रीडिंग पर सवाल?
इन दोनों विवादों ने शिक्षाविदों और अभिभावकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि अगर देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड की किताबों में इस तरह की अश्लील त्रुटियां या बिना संदर्भ की संवेदनशील बातें छपेंगी, तो बच्चों के भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा? अब सभी की नजरें पटना हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को कक्षा 1 की किताब पर अपना अंतिम जवाब दाखिल करना है।


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