Tuesday, October 13, 2026

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Moody’s की रिपोर्ट: भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर किया 7%, कच्चे तेल और अल नीनो को बताया बड़ी चुनौती

नई दिल्ली:
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ा और सकारात्मक अनुमान जारी किया है। मूडीज ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर के अनुमान को पहले के 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी मजबूती और स्थिरता देखी जा रही है।

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि घरेलू मोर्चे पर मजबूत मांग, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकारी खर्च और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में आई तेजी के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखेगा।

ऊर्जा और खाद्य कीमतों को लेकर बड़ी चेतावनी

विकास दर के सकारात्मक अनुमान के साथ ही, मूडीज ने अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद कुछ गंभीर जोखिमों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है:

  • कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मूडीज के अनुसार, यदि ऊर्जा की कीमतें और बढ़ती हैं, तो भारत में आयात खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर देश की राजकोषीय स्थिति पर पड़ सकता है।
  • अल नीनो और खाद्य महंगाई: मौसम के बदलते पैटर्न (El Niño) के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों (विशेषकर दालों, सब्जियों और अनाजों) की कीमतों में उछाल आ सकता है, जो आम जनता की जेब पर भारी पड़ेगा।
  • ब्याज दरों में कटौती में देरी: यदि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों के कारण महंगाई (Inflation) नियंत्रित नहीं होती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने की संभावना कम हो जाएगी। महंगी ब्याज दरें लंबे समय तक रहने से निजी निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि मूडीज द्वारा जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाना भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के लिए एक बूस्टर डोज़ की तरह काम करेगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारत को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में देखना जारी रखेंगे। हालांकि, कच्चे तेल के वैश्विक संकट और महंगाई के आंकड़ों पर बाजार की पैनी नजर बनी रहेगी।

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