भारतीय शेयर बाजार इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत तक बाजार में गिरावट का एक ऐसा सिलसिला बन चुका है, जिसने पिछले ढाई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चालू सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन (1 अक्टूबर 2026) को भी बाजार भारी नुकसान के साथ लाल निशान पर बंद हुआ, जिसके बाद दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं।
पेश है इस ऐतिहासिक मंदी पर एक विशेष और विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट:
25 साल का रिकॉर्ड टूटा: कोरोना और 2008 की मंदी से भी लंबा सिलसिला
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 लगातार 8वें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए हैं। पिछले 25 वर्षों में यह पहला मौका है जब बाजार में लगातार इतने हफ्तों तक साप्ताहिक गिरावट (Weekly Losing Run) दर्ज की गई है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: इससे पहले साल 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के दौरान बाजार लगातार 9 हफ्तों तक गिरा था।
- कोरोना काल से बड़ी मंदी: इस बार की लगातार गिरावट ने साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और साल 2020 के कोविड-19 क्रैश के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है, जब बाजार लगातार 7 हफ्तों तक लाल निशान में रहा था।
निवेशकों को लगा ₹26 लाख करोड़ का झटका
पिछले दो महीनों (8 हफ्तों) के भीतर आई इस चौतरफा बिकवाली के कारण बीएसई (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों का सामूहिक बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) बुरी तरह प्रभावित हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, इस मंदी में निवेशकों की ₹26 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति स्वाहा हो चुकी है. चालू सप्ताह के दौरान ही निफ्टी में करीब 3.1% और सेंसेक्स में 2.7% की बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी गई है.
📊 सूचकांकों की वर्तमान स्थिति (1 अक्टूबर क्लोजिंग डेटा)
- Sensex: अंतिम कारोबारी सत्र में 570 अंक (0.79%) फिसलकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ।
- Nifty 50: 198 अंक (0.87%) की कमजोरी के साथ 22,421.95 के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों की चेतावनी: निफ्टी अपने अब तक के उच्चतम स्तर (All-Time High – 26,373) से लगभग 15% नीचे आ चुका है। तकनीकी भाषा में यदि कोई बाजार अपने उच्चतम स्तर से 20% तक गिर जाता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर ‘बियर模arket’ (Bear Market) या मंदी का दौर मान लिया जाता है। भारतीय बाजार अब इस सीमा के बेहद करीब है।
⚠️ दलाल स्ट्रीट पर मंदी के 4 सबसे बड़े कारण
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की रिकॉर्ड बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं. चीनी बाजारों में आए नए आर्थिक सुधारों और अन्य उभरते बाजारों की तरफ FIIs का झुकाव भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है।
- वैश्विक बॉन्ड यील्ड में अभूतपूर्व उछाल: अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. जब सरकारी बॉन्ड पर सुरक्षित और अधिक रिटर्न मिलने लगता है, तो बड़े वैश्विक फंड मैनेजर जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड मार्केट में लगाने लगते हैं.
- कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतें: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं. भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए तेल का महंगा होना देश में महंगाई और व्यापार घाटे को सीधे बढ़ावा दे रहा है।
- घरेलू कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे: भारत के ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी (FMCG) और आईटी सेक्टर की कई दिग्गज कंपनियों के चालू तिमाही के जमीनी आंकड़े और बिक्री अनुमान बेहद कमजोर रहे हैं, जिससे घरेलू स्तर पर भी सेंटिमेंट खराब हुआ है।
आगे क्या? सोमवार को खुलेगा बाजार
आज शुक्रवार (2 अक्टूबर) को महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण भारतीय शेयर बाजार, डेरिवेटिव्स और कमोडिटी端arket पूरी तरह बंद रहे। शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के बाद अब बाजार सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुबह अपने नियमित समय पर खुलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और सप्ताहांत (Weekend) में मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरों पर निर्भर करेगी।


