Sunday, October 4, 2026

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने वाली संतान होगी संपत्ति से बेदखल

नई दिल्ली:
देश की शीर्ष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता को यह कानूनी और नैतिक अधिकार है कि वे उन बच्चों को अपनी संपत्ति से बाहर कर सकें, जो बुजुर्ग अवस्था में उन्हें मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वृद्ध माता-पिता को सम्मान, सुरक्षा और सुखद वातावरण देना ही एक सभ्य समाज की सच्ची पहचान है।


अदालत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और भरण-पोषण कानून (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act) से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि संतान माता-पिता की संपत्ति पर अपना अधिकार मान लेती है, लेकिन उनकी देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे हट जाती है। अदालत ने साफ किया कि अगर बच्चे अपने बुजुर्गों का ध्यान रखने में विफल रहते हैं या उन्हें परेशान करते हैं, तो माता-पिता उन्हें अपनी स्व-अर्जित संपत्ति से बेदखल (evict) कर सकते हैं।

फैसले के मुख्य बिंदु:


बेदखली का स्पष्ट अधिकार: यदि संतान बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करती या उनके साथ दुर्व्यवहार करती है, तो माता-पिता प्रशासन और अदालत की मदद से उन्हें घर व संपत्ति से निकाल सकते हैं।
सभ्य समाज की जिम्मेदारी: अदालत ने कहा कि बुजुर्गों को केवल भोजन या आश्रय देना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना समाज और परिवार का दायित्व है।
कानूनी संरक्षण: वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल को यह अधिकार है कि वह बुजुर्गों की शिकायत पर संपत्ति खाली करने का आदेश जारी कर सके।


कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से देश भर के उन लाखों वरिष्ठ नागरिकों को राहत और संबल मिलेगा जो अपनी ही संतान के दुर्व्यवहार का शिकार हो रहे हैं। यह फैसला समाज में यह कड़ा संदेश देता है कि अधिकारों की मांग बिना कर्तव्यों के पूरी नहीं हो सकती।

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