तमिलनाडु में ₹100 करोड़ का बड़ा घोटाला: पार्टी फंड के बदले प्राइवेट स्कूलों को बांटी मान्यता, पूर्व मंत्री गिरफ्तार
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति और शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के एक पूर्व मंत्री को ₹100 करोड़ के कथित घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि उन्होंने मंत्री पद पर रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर लगभग 1,000 प्राइवेट स्कूलों को मान्यता (Recognition) और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां दीं, जिसके बदले में करोड़ों रुपये का ‘पार्टी फंड’ वसूला गया।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा खेल प्राइवेट स्कूलों को अवैध तरीके से मान्यता और सरकारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने का है। नियमों के मुताबिक, स्कूलों को मान्यता देने के लिए कई कड़े सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के मानकों को पूरा करना होता है। लेकिन, आरोप है कि पूर्व मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इन नियमों में ढील दी।
1,000 से अधिक स्कूल जांच के दायरे में
जांच में सामने आया है कि करीब 1,000 से अधिक निजी स्कूल इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। इन स्कूलों से कथित तौर पर मोटी रकम वसूली गई और उसे ‘पार्टी फंड’ के नाम पर डायवर्टी किया गया।
घोटाले का मुख्य तरीका:
- नियमों की अनदेखी: बिना फिजिकल वेरिफिकेशन (मौके पर जांच) के स्कूलों को फिटनेस और बिल्डिंग सर्टिफिकेट जारी किए गए।
- पार्टी फंड का दबाव: मान्यता नवीनीकरण (Renewal) और नई मंजूरियों के लिए स्कूलों पर तय रकम देने का दबाव बनाया गया।
- करोड़ों का लेन-देन: शुरुआती जांच में यह आंकड़ा ₹100 करोड़ से ऊपर का बताया जा रहा है।
विपक्ष हमलावर, सरकार ने दी सफाई
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्ष ने सत्तापक्ष पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है। वहीं, मौजूदा सरकार का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसियां पूर्व मंत्री से पूछताछ कर रही हैं, और आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।


