Saturday, October 17, 2026

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Tata Group Controversy: टाटा संस में छिड़ी कॉर्पोरेट जंग, नोएल टाटा क्यों हुए चंद्रशेखरन के खिलाफ?

टाटा ग्रुप में महासंग्राम: एन चंद्रशेखरन को फिर मिली कमान, नोएल टाटा ने फैसले को बताया ‘गैर-कानूनी’

मुंबई: भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व में एक अभूतपूर्व और बड़ा कॉर्पोरेट विवाद खड़ा हो गया है। टाटा संस के बोर्ड ने भारी मतभेद और नाटकीय घटनाक्रम के बीच एन चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए दोबारा एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुनने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

हालांकि, टाटा संस में 66% की नियंत्रण हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने बोर्ड के इस फैसले को पूरी तरह से ‘गैर-कानूनी’ और ‘शून्य’ करार देकर ग्रुप में एक बड़ी कानूनी जंग के संकेत दे दिए हैं।

बोर्ड मीटिंग का पूरा घटनाक्रम: 4-1 से पास हुआ प्रस्ताव

टाटा संस की इस बेहद संवेदनशील बोर्ड बैठक में चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर वोटिंग हुई। इस बैठक में बोर्ड के 4 निदेशकों ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर और चेयरमैन नोएल टाटा ने इसके विरोध में अकेला वोट डाला।

बता दें कि चंद्रशेखरन ने इससे पहले खुद सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि वे फरवरी 2027 में अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा होने के बाद अगला टर्म नहीं लेंगे। लेकिन बोर्ड की नॉमिनेशन कमेटी ने समूह के व्यापक हितों का हवाला देकर उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, जिसे चंद्रा ने स्वीकार कर लिया।

नोएल टाटा की मुख्य कानूनी आपत्तियां क्या हैं?

नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है और इसके पीछे मुख्य तौर पर तीन बड़े कारण बताए हैं:

  • आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का उल्लंघन: नोएल टाटा का स्पष्ट तर्क है कि टाटा संस के नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामांकित दोनों निदेशकों की सहमति अनिवार्य है। चूंकि उन्होंने विरोध में वोट किया है, इसलिए यह फैसला कानूनी रूप से अमान्य है।
  • पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय: नोएल टाटा ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की एक लिखित कानूनी राय भी बोर्ड के सामने पेश की। ट्रस्ट्स का आरोप है कि टाटा संस के बोर्ड ने इस महत्वपूर्ण कानूनी राय को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
  • एयर इंडिया और डिजिटल बिजनेस का नुकसान: सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा ग्रुप के कुछ बिना-लिस्टेड बिजनेस जैसे एयर इंडिया और टाटा डिजिटल (बिगबास्केट आदि) में हो रहे भारी नुकसान को लेकर भी चंद्रशेखरन की रणनीतियों से असहमत थे।

टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) पर भी रार

इस विवाद की दूसरी सबसे बड़ी वजह टाटा संस का संभावित आईपीओ (IPO) है। आरबीआई के नियमों के अनुसार टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। चंद्रशेखरन और टाटा संस का बोर्ड इस लिस्टिंग के पक्ष में आगे बढ़ रहा है, जबकि नोएल टाटा इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। नोएल टाटा का मानना है कि पब्लिक लिस्टिंग से टाटा ग्रुप का पारंपरिक चैरिटी मॉडल और स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

आगे क्या होगा? (What’s Next for Tata Group)

कॉर्पोरेट जगत के जानकारों के मुताबिक, यह विवाद अब थमने वाला नहीं है। टाटा ट्रस्ट्स अब इस री-अपॉइंटमेंट को कानूनी तौर पर अदालत या एनसीएलटी (NCLT) में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, आगामी सालाना आम बैठक (AGM) में चंद्रशेखरन को डायरेक्टर पद से हटाने के लिए शेयरहोल्डर वोटिंग का सहारा भी लिया जा सकता है।

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