Friday, October 23, 2026

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ईरान युद्ध का असर, बसों का किराया बढ़ाने की मांग: बस संचालक बोले- न्यूनतम किराया 2.50 रुपए प्रति किमी करने दें सरकार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिलने लगा है। डीजल की बढ़ती कीमतों और अन्य खर्चों में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए, निजी बस संचालकों ने राज्य सरकार से यात्री किराए में वृद्धि करने की पुरजोर मांग की है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बसों का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

किराए में वृद्धि की मांग:

बस संचालकों के प्रमुख संगठनों ने सरकार से मांग की है कि बसों का न्यूनतम किराया 2.50 रुपए प्रति किलोमीटर तय किया जाए। उनका तर्क है कि पिछले कुछ समय से डीजल के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है, स्पेयर पार्ट्स महंगे हो गए हैं, और कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य परिचालन लागतों में भी भारी वृद्धि हुई है।

संचालकों की चिंताएं:

  • डीजल की कीमतें: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका सीधा असर डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। डीजल बस संचालन का सबसे बड़ा खर्च है।
  • परिचालन लागत: डीजल के अलावा, टायर, स्पेयर पार्ट्स, टोल टैक्स और कर्मचारियों के वेतन में भी वृद्धि हुई है, जिससे बस संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
  • घाटे का सौदा: बस ऑपरेटरों का दावा है कि वर्तमान किराए में बसों का संचालन करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है और कई संचालक अपनी बसें खड़ी करने को मजबूर हैं।

सरकार से उम्मीदें:

बस संचालकों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करें और जल्द से जल्द किराए में वृद्धि की घोषणा करें। उनका कहना है कि यदि किराए में वृद्धि नहीं की गई, तो बस परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

आगे क्या?

अब देखना यह है कि राज्य सरकार बस संचालकों की इस मांग पर क्या फैसला लेती है। सरकार को एक तरफ बस संचालकों की चिंताओं को दूर करना है, तो दूसरी तरफ आम जनता पर महंगाई का बोझ भी नहीं पड़ने देना है। यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, और उम्मीद है कि सरकार कोई बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेगी।

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