Saturday, August 15, 2026

TOP NEWS

​स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान:...

एनटीवी टाइम जिला कुलगाम के रिपोर्टर सैयद आशिक अली को पत्रकारिता में उनके...

स्वतंत्रता दिवस पर MP...

भोपालमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के विकास और युवाओं...

रीवा में स्वतंत्रता दिवस...

रीवा:मध्य प्रदेश के रीवा जिले से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर...

Ranchi RIMS News: JPSC-JSSC...

रांची:झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की...
Homeमध्य प्रदेशएमपी के 22 हजार मंदिरों की संपत्तियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, एक...

एमपी के 22 हजार मंदिरों की संपत्तियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, एक क्लिक पर ऑनलाइन मिलेगी पूरी जानकारी

एमपी के 22 हजार मंदिरों की संपत्तियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, एक क्लिक पर ऑनलाइन मिलेगी पूरी जानकारी
भोपाल:
मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के मंदिरों और देवस्थानों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल करने जा रही है। राज्य के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा शासन संधारित लगभग 22,000 मंदिरों की चल और अचल संपत्तियों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मंदिरों के पास मौजूद कृषि भूमि, भवनों और अन्य संपत्तियों का सटीक रिकॉर्ड एक स्थान पर संकलित करना है, ताकि प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाया जा सके।
डेटाबेस तैयार होने के बाद इसे धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे प्रदेश का कोई भी नागरिक किसी भी मंदिर के इतिहास, वहां के पुजारी की जानकारी और मंदिर के नाम दर्ज संपत्तियों की वर्तमान स्थिति को घर बैठे ऑनलाइन देख सकेगा। इस डिजिटल व्यवस्था से मंदिरों की कीमती जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों और अतिक्रमण की शिकायतों पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलेगी, साथ ही न्यायालयों में लंबित संपत्ति संबंधी विवादों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा।
सरकारी व्यवस्था के अनुसार जिन मंदिरों के पास दस एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, उसकी नीलामी जिला प्रशासन द्वारा कराई जाती है और प्राप्त आय को मंदिर के खाते में जमा किया जाता है। वहीं दस एकड़ से कम भूमि वाले मंदिरों के प्रबंधन का अधिकार पुजारी के पास ही रहता है। डिजिटल डेटाबेस बन जाने से इन दोनों ही श्रेणियों की भूमियों का ऑनलाइन लेखा-जोखा उपलब्ध रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय होगी और मध्य प्रदेश के पौराणिक एवं ऐतिहासिक देवस्थानों की संपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments