कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स जैसे ओला (Ola), उबर (Uber) और इनड्राइव (InDrive) से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। सरकार ने ऑनलाइन कैब कंपनियों द्वारा यात्रियों से ‘जल्दी बुकिंग’ या ‘राइड पक्की करने’ के नाम पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क पर कड़ा रुख अपनाया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों को ‘एडवांस टिप’ और ‘ऐड-ऑन’ फीचर्स तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही, महाराष्ट्र सरकार कैब ड्राइवरों के लिए स्थानीय भाषा (मराठी) का ज्ञान अनिवार्य करने के नियम पर विचार कर रही है, जो इस समय काफी चर्चा में है।
1. ‘एडवांस टिप’ और एक्स्ट्रा चार्ज पर क्यों लगी रोक?
अक्सर देखा जाता था कि पीक आवर्स या भारी बारिश के समय कैब आसानी से बुक नहीं होती थी। ऐसे में ऐप यात्रियों को राइड जल्दी कन्फर्म कराने के लिए ‘एडवांस टिप’ या अतिरिक्त ‘ऐड-ऑन फीस’ जोड़ने का विकल्प दिखाते थे।
सरकार का मानना है कि:
अनुचित व्यापार व्यवहार: यह तरीका ग्राहकों को मजबूरी में अधिक पैसे देने के लिए उकसाता है।
ग्राहकों पर दबाव: राइड मिलने की गारंटी के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज वसूलना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
पारदर्शिता का अभाव: फेयर (किराया) तय करने के पारदर्शी नियमों का पालन होना चाहिए, न कि टिप के नाम पर मनमाना चार्ज।
मुख्य फैसला: अब एग्रीगेटर कंपनियां राइड बुक होने से पहले ग्राहक से किसी भी प्रकार की टिप या अतिरिक्त फीस की मांग नहीं कर सकतीं।
2. महाराष्ट्र में कैब ड्राइवरों के लिए ‘मराठी अनिवार्य’ का नियम
कैब नियमों में बदलाव के बीच महाराष्ट्र से एक और बड़ा फैसला चर्चा में है। राज्य परिवहन विभाग कैब एग्रीगेटर्स के तहत गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का मूलभूत ज्ञान अनिवार्य करने की तैयारी में है।
क्यों हो रही है यह चर्चा?
स्थानीय यात्रियों से बेहतर संवाद: परिवहन विभाग का मानना है कि ड्राइवरों को मराठी आने से स्थानीय यात्रियों और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के दौरान संवाद में आसानी होगी।
सुरक्षा और सहूलियत: किसी आपातकालीन स्थिति या रास्ता भटकने पर भाषा की रुकावट खत्म होगी।
परमिट नियम: राज्य में नए कैब परमिट या लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) के लिए इस नियम को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।


