फर्जी गवाह मामला: चंदन नगर TI पर 1350 फर्जी गवाहों का आरोप, एक TI डिमोट; दूसरे पर मेहरबानी क्यों?
इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामलों की जांच और चालान पेश करने में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां कागजों पर 1350 फर्जी गवाह तैयार कर दिए गए।
कार्रवाई में दोहरा रवैया?
इस पूरे फर्जी गवाह प्रकरण में पुलिस विभाग की कार्रवाई पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं:
एक TI पर गाज: फर्जी गवाह बनाने के मामले में संलिप्तता पाए जाने पर एक थाना प्रभारी (TI) को डिमोट (पद अवनत) कर दिया गया है। इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में दो अन्य TI पर डिमोशन की कार्रवाई हो चुकी है।
दूसरे पर अब तक मेहरबानी: चंदन नगर TI, जिन पर अकेले 1350 फर्जी गवाहों के मामलों से जुड़ाव का गंभीर आरोप है, उन पर अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।
क्या है पूरा मामला?
जांच में यह बात सामने आई कि पुलिस फाइलों में मुकदमों को मजबूत करने और कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए ऐसे गवाहों के नाम दर्ज किए गए, जिनका घटना से कोई लेना-देना ही नहीं था। कई मामलों में तो गवाहों के पते और पहचान पूरी तरह फर्जी पाए गए।
जब उच्च अधिकारियों और न्यायालय के समक्ष इन गवाहों की पड़ताल हुई, तब इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। एक ही थाने और उससे जुड़े अधिकारियों द्वारा इतनी बड़ी संख्या में फर्जी गवाह खड़ा करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।
उठ रहे गंभीर सवाल
जब एक ही जैसे मामले में तीन TI डिमोट किए जा चुके हैं, तो चंदन नगर TI पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
1350 फर्जी गवाहों के बल पर दर्ज किए गए मुकदमों में जिन आम लोगों को आरोपी बनाया गया, उनके न्याय का क्या होगा?
क्या इस पूरे नेटवर्क में निचले स्तर के जांच अधिकारियों (IO) की भी साठगांठ थी?
फिलहाल इस मामले को लेकर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अलग-अलग अधिकारियों पर अलग-अलग रुख को लेकर महकमे के भीतर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।


