Monday, September 28, 2026

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इंदौर के पलासिया में मशहूर प्रॉपर्टी कारोबारी और कॉलोनाइजर संदीप उर्फ बंटी नागर का ऑफिस में निधन। पुलिस मामले की जांच में जुटी, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल खंगाल रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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बड़ी राहत! 28 से 30 सितंबर तक होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल आधिकारिक रूप से टली। सोमवार से देश के सभी सरकारी और ग्रामीण बैंकों में कामकाज रहेगा पूरी तरह सामान्य।

एमपी पुलिस आरक्षक (बैंड)...

MP Police Constable Band Result 2026: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने पुलिस आरक्षक (बैंड) भर्ती का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। 560 पदों के लिए अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई है। करीब 40 हजार उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। अपना रिजल्ट esb.mp.gov.in पर चेक करें।
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भारत में नशे की भयावह स्थिति और युवाओं पर मंडराता खतरा: एक विशेष रिपोर्ट

भारत में नशे की भयावह स्थिति और युवाओं पर मंडराता खतरा: एक विशेष रिपोर्ट
भारत में मादक पदार्थों (ड्रग्स) का सेवन एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा AIIMS की राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 16 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार के नशे का सेवन करते हैं। इनमें से लगभग 3 करोड़ से अधिक लोग गंभीर रूप से नशे की लत के शिकार हैं, जिन्हें तत्काल इलाज और पुनर्वास की आवश्यकता है।
छात्रों को नशा सप्लाई का नेटवर्क
स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी कैंपस के आसपास का इलाका नशा तस्करों का मुख्य निशाना होता है। तस्कर छात्रों को निशाना बनाने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाते हैं। कैंपस के आसपास स्थित चाय की दुकानें, टपरी, हुक्का बार और प्राइवेट पीजी नशा सप्लाई के मुख्य केंद्र बन जाते हैं। तस्कर सबसे पहले किसी छात्र को मुफ्त या सस्ते दाम पर ड्रग्स देकर लत लगाते हैं और बाद में वही छात्र अपने दोस्तों को जोड़ने के लिए कमीशन पर काम करने लगता है।
वर्तमान समय में यह नेटवर्क पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। नशा सप्लाई के लिए टेलीग्राम ग्रुप्स, स्नैपचैट और डार्क वेब का सहारा लिया जा रहा है, जहाँ ऑनलाइन यूपीआई से भुगतान लेकर कूरियर या गुप्त ठिकानों के जरिए डिलीवरी की जाती है।
सप्लायर और उनका बहुस्तरीय सिंडिकेट
नशा सप्लाई करने वाला तंत्र एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की तरह काम करता है। इसमें मुख्य तस्कर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या पड़ोसी राज्यों से भारी मात्रा में हेरोइन, सिंथेटिक ड्रग्स (MDMA, मेथ) और गांजा भारत में मंगवाते हैं। इसके बाद शहर स्तर के लोकल डिस्ट्रीब्यूटर इस माल की पैकेजिंग छोटे टुकड़ों में करते हैं। सबसे निचले स्तर पर स्ट्रीट पेडलर्स होते हैं जो सीधे छात्रों और युवाओं तक पहुँच बनाकर उन्हें ड्रग्स बेचते हैं।
ड्रग सिंडिकेट में नेताओं की साठगांठ और राजनीतिक दांव-पेच
नशे के इस काले कारोबार में कई बार स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठते रहते हैं। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की कई बड़ी कार्यवाइयों में यह सामने आया है कि रसूखदार राजनीतिक संरक्षण के कारण बड़े सप्लायर और किंगपिन आसानी से कानून की गिरफ्त से बच निकलते हैं या उन्हें पहले ही सतर्क कर दिया जाता है।
राजनीतिक दल चुनाव के समय एक-दूसरे पर नशा माफिया को पनाह देने और ‘ड्रग मनी’ का इस्तेमाल चुनावों में करने का आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई अक्सर धीमी पड़ जाती है। जब तक राजनेता और प्रशासन अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाकर इस गठजोड़ को पूरी तरह ध्वस्त नहीं करेंगे, तब तक देश की युवा पीढ़ी को इस दलदल से निकालना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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