17 अगस्त का इतिहास: मदन लाल ढींगरा की शहादत से लेकर देश के बंटवारे की ‘लकीर’ तक, जानें आज के दिन क्या बदला
नई दिल्ली: इतिहास की नजर से 17 अगस्त का दिन भारत और दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है। आज ही के दिन देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूलने वाले क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा शहीद हुए थे, तो दूसरी तरफ भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे की खूनी लकीर यानी ‘रैडक्लिफ लाइन’ को भी आज ही के दिन आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने रखा गया था। आइए नजर डालते हैं आज के दिन की उन बड़ी घटनाओं पर जिन्होंने इतिहास का रुख बदल दिया।
क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा का सर्वोच्च बलिदान
साल 1909 में आज ही के दिन (17 अगस्त) भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी मदन लाल ढींगरा को लंदन की पेंटनविले जेल में फांसी दी गई थी। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारी कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी थी। फांसी के फंदे पर चढ़ने से पहले उन्होंने कहा था कि वे अपनी मातृभूमि के लिए बार-बार जन्म लेना और मरना चाहते हैं। उनका यह बलिदान आज भी देशवासियों में देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है।
खिंच गई भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लकीर
17 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद दोनों देशों की सीमाओं को निर्धारित करने वाली ‘रैडक्लिफ लाइन’ (Radcliff Line) को आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया गया था। ब्रिटिश आर्किटेक्ट सिरिल रैडक्लिफ द्वारा खींची गई इस लकीर ने रातों-रात लाखों लोगों को अपने ही घरों में शरणार्थी बना दिया था और इसके बाद इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन और दंगा देखा गया था।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया-उल-हक की विमान हादसे में मौत
पड़ोसी देश पाकिस्तान के इतिहास के लिए भी यह दिन एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। 17 अगस्त 1988 को पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य तानाशाह और राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक की एक रहस्यमय विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। बहावलपुर के पास हुए इस हादसे में उनके साथ अमेरिकी राजदूत अर्नोल्ड राफेल की भी जान गई थी, जिसके बाद पाकिस्तान में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया था।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज के अन्य बड़े घटनाक्रम
- इंडोनेशिया की आजादी: साल 1945 में आज ही के दिन इंडोनेशिया ने नीदरलैंड (डच शासन) से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी।
- माइकल फेल्प्स का महारिकॉर्ड: खेल जगत में आज ही के दिन साल 2008 में अमेरिकी तैराक माइकल फेल्प्स ने बीजिंग ओलंपिक में 8वां स्वर्ण पदक जीतकर एक ही ओलंपिक में सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड बनाया था।
- तकनीक की दुनिया में क्रांति: 1982 में आज ही के दिन जर्मनी में दुनिया की पहली कमर्शियल कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) तैयार की गई थी, जिसने संगीत की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।


