Wednesday, November 4, 2026

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शर्मनाक! बिहार के बक्सर में अमानवीयता की हदें पार, शव को ज़मीन पर घसीटकर पोस्टमार्टम हाउस ले जाने का Video वायरल

शर्मनाक! बिहार के बक्सर में अमानवीयता की हदें पार, शव को ज़मीन पर घसीटकर पोस्टमार्टम हाउस ले जाने का Video वायरल

बक्सर: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देने वाला एक बेहद शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में पुराने सदर अस्पताल परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर, एक अज्ञात शव को सम्मानपूर्वक स्ट्रेचर पर ले जाने के बजाय, पैरों की तरफ से चादर पकड़कर करीब 15-20 मीटर तक पथरीली ज़मीन पर बेरहमी से घसीटते हुए अंदर ले जाते देखा जा रहा है। इस अमानवीय दृश्य ने अस्पताल प्रशासन और रेल पुलिस (GRP) दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना बक्सर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के पैदल पुल के पास की है, जहां राजकीय रेल पुलिस (GRP) को एक अज्ञात लावारिस शव मिला था। नियमानुसार, जीआरपी ने शव को एक रिक्शे पर लदवाकर पोस्टमार्टम के लिए पुराने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस भेजा था।

अस्पताल पहुंचने के बाद, वहां स्ट्रेचर टूटा होने और अतिरिक्त कर्मचारियों की मौजूदगी न होने के कारण, शव को रिक्शे से उतारकर ज़मीन पर रख दिया गया। इसके बाद, वहां मौजूद एक शख्स ने कफ़न में लिपटे शव को अकेले ही ज़मीन पर बेरहमी से घसीटना शुरू कर दिया और पोस्टमार्टम रूम के भीतर ले गया। वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना का 1 मिनट 25 सेकंड का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

कर्मचारी की बेबसी या सिस्टम की नाकामी?

वीडियो में शव को घसीट रहे व्यक्ति की पहचान बिहारी कुमार (बिहारी राम) के रूप में हुई है। जब उससे इस तरह शव ले जाने का कारण पूछा गया, तो उसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी:

  • स्टाफ की भारी कमी: बिहारी कुमार ने बताया कि एक भारी-भरकम शव को उठाने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत होती है, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस पर वह बिल्कुल अकेला था।
  • कम मेहनताना और मजबूरी: उसने बताया कि लावारिस शव को घटना स्थल से उठाने, पोस्टमार्टम हाउस लाने, 3 दिन तक शव के पहचान का इंतज़ार करने और फिर अंतिम संस्कार करने तक के पूरे काम के लिए उसे बहुत ही मामूली मेहनताना मिलता है। अकेले होने के कारण उसके पास शव को घसीटकर अंदर पहुंचाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

स्वास्थ्य विभाग और GRP के बयानों में विरोधाभास

घटना का वीडियो वायरल होने और चौतरफा आलोचना होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है, लेकिन दोनों जिम्मेदार महकमे अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं।

इस मामले पर बक्सर के सिविल सर्जन डॉ. शिवकुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने घटना का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग का बचाव करते हुए साफ किया कि वीडियो में शव घसीटता दिख रहा बिहारी कुमार उनका आधिकारिक कर्मचारी नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस में ‘शंकर’ नाम का सरकारी कर्मी तैनात है, जिससे इस लापरवाही को लेकर पूछताछ की जा रही है।

दूसरी तरफ, राजकीय रेल थाना (GRP) के थानाध्यक्ष ने स्वीकार किया कि बिहारी उनके यहां अज्ञात शवों को अस्पताल पहुंचाने का काम करता है। उन्होंने सिस्टम की बड़ी कमी को उजागर करते हुए माना कि जीआरपी के पास शवों को ले जाने के लिए एंबुलेंस या किसी सरकारी वाहन की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी मजबूरी के कारण निजी स्तर पर रिक्शे आदि से शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेजा जाता है।

इंसानियत और व्यवस्था पर बड़े सवाल

इस शर्मनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मरने के बाद एक लावारिस इंसान का शव न्यूनतम सम्मान पाने का भी हकदार नहीं है? स्वास्थ्य विभाग और रेलवे पुलिस के दावों के बीच, पोस्टमार्टम हाउस जैसी संवेदनशील जगह पर टूटे स्ट्रेचर और कर्मचारियों की कमी को समय रहते दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?

फिलहाल बक्सर के सिविल सर्जन की जांच रिपोर्ट आने का इंतज़ार है, जिसके बाद ही साफ होगा कि इस अमानवीय कृत्य के लिए असल जिम्मेदार कौन है और उन पर क्या कार्रवाई की जाती है।


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