Wednesday, October 14, 2026

TOP NEWS

मेरठ का चर्चित नीला...

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड (Meerut Drum Murder Case) में जिला अदालत ने आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। पूरी खबर पढ़ें।

MP News: भोपाल में...

भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी (TI) रतन सिंह परिहार को 'जय जोहार' बोलने पर आदिवासी छात्रों को गाली देने और 'यहीं कूट दूंगा' की धमकी देने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सस्पेंड कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें।

गूगल डेटा सेंटर विवाद:...

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बन रहे गूगल के मेगा डेटा सेंटर पर 160 एकड़ जंगल काटने और जल संकट पैदा करने के आरोप लगे हैं, जिस पर कंपनी ने एयर-कूलिंग तकनीक की सफाई दी है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: CJP...

दिल्ली की अदालत ने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रदर्शन और शांति बॉन्ड के उल्लंघन मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। पूरी खबर पढ़ें।
Homeमध्य प्रदेशसालाना ₹22500 करोड़ का भारी बोझ! लाड़ली बहना योजना को MP हाईकोर्ट...

सालाना ₹22500 करोड़ का भारी बोझ! लाड़ली बहना योजना को MP हाईकोर्ट में चुनौती, 4 हफ्ते में मांगा रिकॉर्ड

ग्वालियर (NTV TIME):
मध्य प्रदेश सरकार की सबसे चर्चित योजना ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ अब कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक महिलाओं को दी जाने वाली ₹1500 की मासिक किस्त को तुरंत रोकने और योजना की उपयोगिता की समीक्षा करने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मुख्य सचिव समेत महिला एवं बाल विकास और वित्त विभाग को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।

हालांकि, न्यूज़ पोर्टल के पाठकों को स्पष्ट कर दें कि हाईकोर्ट ने फिलहाल योजना के क्रियान्वयन या मासिक किस्तों के भुगतान पर कोई अंतरिम रोक (Stay) नहीं लगाई है।

‘नकद पैसे बांटने के बजाय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाए सरकार’

यह जनहित याचिका थाटीपुर, ग्वालियर की पूर्व पार्षद सुधा दुबे द्वारा अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से कोर्ट में पेश की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वे महिला सशक्तीकरण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बिना किसी कौशल विकास (Skill Development), वोकेशनल ट्रेनिंग या जमीनी रोजगार के सीधे बैंक खातों में नकद राशि ट्रांसफर करना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि सरकारी खजाने के इस भारी-भरकम पैसे का इस्तेमाल राज्य में नए उद्योग-धंधे लगाने और महिलाओं के लिए रोजगार के स्थायी अवसर तैयार करने में होना चाहिए। इससे राज्य के भीतर एक मजबूत आर्थिक चक्र बनेगा जो महिलाओं को लंबे समय तक आत्मनिर्भर बनाए रखेगा।

सालाना ₹22,500 करोड़ से अधिक का भारी-भरकम बोझ

याचिका में राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे कर्ज और इस योजना के वित्तीय संतुलन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं:

  • वित्तीय भार: वर्तमान में प्रदेश की लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹1500 दिए जा रहे हैं, जिससे खजाने पर प्रति माह करीब ₹1,878 करोड़ और सालाना ₹22,500 करोड़ से अधिक का सीधा भार पड़ रहा है।
  • बजटीय प्रावधान: वित्तीय वर्ष के राज्य बजट में इस योजना के लिए ₹23,882 करोड़ की विशाल राशि आरक्षित की गई है।
  • नीति पर सवाल: याचिका में आपत्ति जताई गई है कि राज्य सरकार एक तरफ लगातार बाजार से भारी कर्ज उठा रही है और दूसरी तरफ उस राशि को बिना किसी ठोस आर्थिक मूल्यांकन के नकद सहायता के रूप में बांट रही है।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: सरकार खुद पेश करे सवा करोड़ लाभार्थियों का डेटा

सुनवाई के दौरान जब शासकीय अधिवक्ताओं ने यह तकनीकी आपत्ति उठाई कि योजना का लाभ ले रही सवा करोड़ महिलाओं को इस मामले में सीधे प्रतिवादी (Party) नहीं बनाया गया है, तो कोर्ट ने इस पर कड़ा निर्देश दिया।

जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य शासन को आदेश दिया कि वे खुद योजना के सभी लाभार्थियों की सूची, भुगतान का पूरा रिकॉर्ड और वित्तीय ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। इस सूची के आधार पर शासन के माध्यम से ही प्रभावित पक्षों तक याचिका की प्रतियां पहुंचाई जाएंगी।

चार सप्ताह बाद सरकार की ओर से आने वाले जवाब और वित्तीय आंकड़ों की प्रस्तुति के बाद ही इस बहुचर्चित योजना के भविष्य और कानूनी वैधता पर अगली स्थिति साफ होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments