नई दिल्ली: वैश्विक वित्तीय बाजारों से आ रहे दबाव के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में निवेशक बेहद संभलकर कदम बढ़ा रहे हैं। इस समय दुनिया भर के आर्थिक विशेषज्ञों और शेयर बाजारों की नजरें अमेरिका के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे राष्ट्रीय कर्ज (US National Debt) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों पर टिकी हुई हैं। इन दो बड़े वैश्विक कारकों ने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।
$40 ट्रिलियन के ऐतिहासिक स्तर पर अमेरिकी कर्ज
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका इस समय भारी वित्तीय बोझ के दौर से गुजर रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज $40 ट्रिलियन (40 लाख करोड़ डॉलर) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। आर्थिक रणनीतिकारों का मानना है कि कर्ज का यह बढ़ता दायरा वैश्विक बैंकिंग सिस्टम और बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) पर सीधा असर डाल रहा है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्रूड ऑयल $92 के पार, भारत के लिए बढ़ी चिंता
बाजार के लिए दूसरा सबसे बड़ा सिरदर्द कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया तेजी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें $92 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड का $92 के स्तर को छूना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति (Inflation) के मोर्चे पर चुनौती खड़ी कर सकता है। तेल की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर घरेलू बाजार के सेंटिमेंट पर देखने को मिल रहा है।
घरेलू निवेशकों ने अपनाया ‘वेट एंड वॉच’ का रुख
इन वैश्विक घटनाक्रमों के बीच आज घरेलू शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में निवेशक काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। पिछले लगातार सात दिनों की गिरावट के बाद हालांकि बाजार में मामूली रिकवरी के प्रयास दिख रहे हैं, लेकिन भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए बड़े संस्थागत खरीदार आक्रामक ट्रेडिंग से बच रहे हैं और ‘वेट एंड वॉच’ यानी देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं।


