ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र में एजी ऑफिस के पास बिना मान्यता के चल रहे ‘मदरसा ए दारुल उल कुरान’ पर मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति (CWC) ने संयुक्त रूप से एक बड़ी छापामार कार्रवाई की है. इस बड़ी कार्रवाई के दौरान बदहाल स्थिति में रह रहे 22 से 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है.
इस पूरी घटना से जुड़े सभी मुख्य विवरणों को बिना किसी टेबल के, प्रॉपर हेडिंग और पैराग्राफ फॉर्मेट में नीचे प्रस्तुत किया गया है:
छापेमारी की मुख्य वजह और लापता बालक का मामला
बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शिकायत मिली थी कि एजी ऑफिस के पास स्थित इस मदरसे में बच्चों को बिना किसी वैध मान्यता और अमानवीय परिस्थितियों में रखा जा रहा है. इसके अलावा, 15 अक्टूबर को इसी मदरसे से एक 13 वर्षीय मासूम बालक अचानक लापता हो गया था, जिसके बाद झांसी रोड थाना पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी. हालांकि बाद में पुलिस ने बालक को सुरक्षित ढूंढ निकाला, लेकिन इस घटना ने मदरसे की सुरक्षा और गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिससे आयोग ने तुरंत एक्शन लिया.
रजिस्टर के आंकड़ों और मौके की हकीकत में बड़ा अंतर
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में जब टीम ने मदरसे के आधिकारिक दस्तावेजों और अटेंडेंस रजिस्टर की जांच की, तो उसमें कुल 15 बच्चियों और 42 बच्चों का रजिस्ट्रेशन दर्ज पाया गया. इसके विपरीत, जब टीम ने मौके पर मौजूद बच्चों की गिनती की, तो वहां केवल 22 से 26 बच्चे ही उपस्थित मिले. बाकी दर्ज बच्चे कहाँ गए और प्रबंधन उन्हें कहाँ लेकर गया, इसका संचालकों के पास कोई जवाब नहीं था, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया.
बंद कमरे में मिलीं 8 बच्चियां और बदहाली का खुलासा
कार्रवाई के दौरान शुरुआती पूछताछ में मदरसा संचालकों ने दावा किया कि यहाँ केवल लड़के ही रहते हैं. लेकिन जब अधिकारियों ने परिसर की सघन तलाशी ली, तो वे दंग रह गए; टीम को अंदर एक अंधेरे बंद कमरे में 8 नाबालिग बच्चियां छिपाई हुई मिलीं. निरीक्षण में सामने आया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से लाए गए इन बच्चों को बुनियादी औपचारिक शिक्षा से पूरी तरह दूर रखा गया था और परिसर के सभी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे भी जानबूझकर बंद रखे गए थे. बच्चों के रहने के कमरों, बिस्तरों और शौचालयों में भारी गंदगी पसरी हुई थी और कुछ बच्चों ने पूर्व में मारपीट व प्रताड़ना की शिकायत भी दर्ज कराई थी.
मदरसे को किया सील और बच्चों को भेजा चाइल्ड केयर होम
‘अंजुमन इस्लाहे मुआशरा समिति’ द्वारा संचालित किए जा रहे इस अवैध मदरसे को प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बंद कराकर सील कर दिया है. रेस्क्यू किए गए 4 से 16 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) की सुरक्षात्मक कस्टडी में लेकर उनकी उम्र के हिसाब से अलग-अलग चाइल्ड केयर होम्स और शिशु आश्रमों में शिफ्ट कर दिया गया है. प्रशासन अब इन बच्चों के माता-पिता से संपर्क साध रहा है, और उनके कानूनी व पारिवारिक दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पूरा होने के बाद ही बच्चों को परिवारों को सुपुर्द किया जाएगा.


