भव्य उत्सव: इंदौर में आज सजेगा सदियों पुराना ‘झांकी और अखाड़ा’ कारवां; जानिए इस ऐतिहासिक परंपरा की पूरी कहानी
इंदौर ब्यूरो: देश की सांस्कृतिक राजधानी और सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आज अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर पारंपरिक और भव्य चल समारोह निकलने जा रहा है। यह भव्य आयोजन सिर्फ एक रात का मेला नहीं है, बल्कि इंदौर की धड़कन, इसके गौरवशाली इतिहास और मिल मजदूरों के हुनर की एक जीवित मिसाल है।
आज शाम ढलते ही इंदौर की प्रमुख सड़कें बहुरंगी रोशनी से जगमगा उठेंगी। शहर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलों की परंपरा को समेटे हुए दर्जनों झांकियां और देश के कोने-कोने से आए अखाड़े अपनी कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन करेंगे।
गौरवशाली इतिहास: बैलगाड़ी से शुरू हुआ था सफर
इंदौर में झांकियों की यह गौरवशाली परंपरा 103 साल से भी अधिक पुरानी है। इसकी शुरुआत कपड़ा मिलों के सुनहरे दौर में हुई थी।
- मजदूरों का जज्बा: जब शहर की बड़ी कपड़ा मिलों (जैसे हुकुमचंद मिल, मालवा मिल, कल्याण मिल, स्वदेशी मिल और होप मिल) का दौर था, तब वहां काम करने वाले मजदूरों ने अपनी कला को दिखाने के लिए इस उत्सव की नींव रखी थी।
- बदलता स्वरूप: शुरुआत में संसाधन बेहद कम होने के कारण झांकियां साधारण बैलगाड़ियों पर निकाली जाती थीं। समय के साथ कपड़ा मिलें तो बंद हो गईं, लेकिन मिलों की श्रमिक यूनियनों और नगर निगम ने मिलकर इस अनूठी सांस्कृतिक विरासत को आज भी जिंदा रखा है।
- अखाड़ों की शस्त्र कला: झांकियों के आगे-आगे चलने वाले इंदौर के पारंपरिक अखाड़े सदियों पुरानी भारतीय युद्ध कला का प्रदर्शन करते हैं। अखाड़ों के उस्ताद, खलीफा और युवा कलाकार लाठी, तलवार, बनेठी और पटेबाजी के ऐसे करतब दिखाते हैं कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।
इस बार की झांकियों की मुख्य विशेषताएं
इस वर्ष का चल समारोह पौराणिक गाथाओं के साथ-साथ आधुनिक सामाजिक संदेशों का बेहतरीन मिश्रण होगा। झांकियों को पूरी तरह से मैकेनिकल मूवमेंट (चलित मूर्तियों) और डिजिटल लाइटिंग से लैस किया गया है।
- पौराणिक प्रसंग: झांकियों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, श्रीकृष्ण लीलाओं और मां दुर्गा के महिषासुर वध जैसे दृश्यों को आधुनिक तकनीक से जीवंत किया गया है।
- सामाजिक संदेश: इस बार कई झांकियों के माध्यम से ‘नारी शक्ति’, ‘पर्यावरण संरक्षण’ और युवाओं को ‘नशामुक्ति’ के प्रति जागरूक करने के विशेष संदेश दिए जा रहे हैं।
- बच्चों के लिए विशेष आकर्षण: बच्चों के मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए पंचतंत्र की कहानियां और जलपरियों की काल्पनिक दुनिया पर आधारित मूविंग झांकियां भी तैयार की गई हैं।
मुख्य मार्ग और व्यवस्थाएं
परंपरा के अनुसार, इस भव्य चल समारोह की शुरुआत सबसे पहले भगवान श्री गणेश की विशेष शासकीय झांकी के साथ होगी।
- मुख्य रूट: यह ऐतिहासिक कारवां DRP लाइन चौराहे से शुरू होकर, जेल रोड, एमजी रोड, कृष्णपुरा, नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग और गोराकुंड होते हुए शहर के मुख्य केंद्र राजवाड़ा पहुंचेगा।
- प्रशासनिक मुस्तैदी: इस बार सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से कड़ी निगरानी रखी जा रही है। व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और वालंटियर्स तैनात किए गए हैं।
- यातायात बदलाव: आम जनता की सुविधा के लिए दोपहर के बाद से ही मुख्य मार्गों पर सामान्य वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है और कई रूट डायवर्ट किए गए हैं।
इंदौर का यह ऐतिहासिक नजारा देखने के लिए न केवल शहर बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग आते है


