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Homeमध्य प्रदेशदतुनी पहाड़ी पर 25 हजार पौधे लगाकर वृक्षारोपण महाअभियान का किया शुभारंभ

दतुनी पहाड़ी पर 25 हजार पौधे लगाकर वृक्षारोपण महाअभियान का किया शुभारंभ

दतुनी पहाड़ी पर 25 हजार पौधे लगाकर वृक्षारोपण महाअभियान का किया शुभारंभ

श्री दादा गुरु महाराज जी एवं मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय रहे मौजूद

दतुनी पहाड़ी पर पहला पौधा एक ऋषि ने रोपा है इसलिए आज से इस पहाड़ी का नाम ऋषि पहाड़ी होगा – मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

पेड़ लगाते समय व्यक्ति के अंदर माँ का ह्दय होना चाहिये हमें बच्चों की तरह पेड़ों को पाल पोस कर वृक्ष बनाना है – मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

हम आने वाली पीढ़ी के लिए ऑक्सीजन जोन बना रहे हैं – मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

गणेशोत्सव के अवसर पर वृक्षारोपण रूपी यह महायज्ञ किया जा रहा है, जो हमारे जीवन को सुरक्षित करने के साथ संरक्षित और संवर्धित करेगा – दादा गुरु महाराज

जब धरती तप रही थी तब एक बालक खड़ा हुआ जिसने मालवा को पहचान दी वह कैलाश है – – दादा गुरु महाराज

इंदौर – 24 सितंबर गुरुवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक पेड़ माँ के नाम महाअभियान के तहत देव गुराड़िया स्थित दतुनी पहाड़ी पर 25 हजार वृक्षों का रोपण किया। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दतुनी पहाड़ी पर पहला पौधा एक ऋषि ने रोपा है इसलिए आज से इस पहाड़ी का नाम ऋषि पहाड़ी होगा। यह वृक्षारोपण आने पीढ़ी के लिए अनमोल सौगात है।

वृक्षारोपण आनेवाली पीढ़ी के लिए प्रकृती की सौगात है

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि दतुनी टेकरी पर वृक्षारोपण करने की मेरी इच्छा कम थी, क्योंकि यह शहर से काफी दूर है इसलिए रखरखाव में यहां काफी दिक्कत आने की आशंका थी, लेकिन विधायक मधु जी के आग्रह पर यह संभव हुआ है। पौधे लगाने के बाद उसको निरंतर जल मिलने की समस्या रहती है और अभी बरसात नहीं हो रही है। पेड़ भी दक्षिण भारत के प्रदेशों से मंगवाए गए हैं और काफी महंगे हैं। 5 फीट के पेड़ है जो आसानी से अपनी जड़े धरती में पकड़ लेते हैं और उनसे जीवित रहने की संभावना काफी अच्छी रहती है। इसलिए अभी हमने 25 हजार पौधारोपण का निर्णय लिया है, जिससे उनको इस पानी की कमी वाले मौसम में भी वृक्ष बना सकें। इस टेकरी पर 70 हजार गड्ढे वृक्षारोपण के लिए किए गए हैं और वन विभाग ने 24 हजार पौधे लगाए हैं। वे सभी जीवित हैं। हम इन पौधों को जीवित रखने के लिए जो सहयोग होगा करेंगे। पौधों के मरने से मेरी रात की नींद उड़ जाती है। मुझे बहुत दुख होता है। पेड़ लगाते समय लगाने वाले व्यक्ति के अंदर माँ का ह्दय होना चाहिये। जिस तरह मां बच्चों को पालती है उसी तरह हमें पेड़ों को पाल पोस कर वृक्ष बनाना है। हम धरती से चले जाएंगे, लेकिन यह पेड़ लंबे समय तक जिंदा रहेंगे। आप जो पेड़ लगाएंगे उसका लाभ कितनी ही पीढ़ियां लेगी और हमें याद करेंगी। इसलिए हम आज वृक्ष लगाकर आने वाली पीढ़ी को सौगात देकर जा रहे हैं। हम आने वाली पीढ़ी के लिए ऑक्सीजन जोन बना रहे हैं। मैने पूरे प्रदेश में अभी 2 करोड़ पेड़ लगाए। मेरी इच्छा 5 करोड़ की थी, लेकिन कम वर्षा से यह संभव नहीं हो पाया। आने वाले समय में जब बारिश होगी तो काफी वृक्ष लगाएंगे और उनका संरक्षण करेंगे। आप लोग पेड़ की सुरक्षा करे यदि कोई गड़बड़ पाई जाती है तो मुझे बताए मैं हर कहीं तो नहीं जाता हूं लेकिन पेड़ों की सुरक्षा के लिए जरूर आऊंगा। मधु जी पार्षद थे और में जब मेयर था तब हमने हाईकोर्ट के सामने बड़े-बड़े पेड़ शिफ्ट किए थे। दुर्भाग्य से उनमे से 5 पेड़ सूख गए तो मैं भगवान की कसम खा कर कह रहा हूं कि मैं रात भर सोया नहीं क्योंकि वे सौ साल से ज्यादा पुराने थे। मुझे लगा कि बड़ा पाप हो गया। हालांकि बाकी सभी शिफ्ट किए 50 पेड़ जिंदा थे। जिस तरह माँ निस्वार्थ भाव से अपने बच्चों से प्यार करती है उसी तरह पेड़ भी अपना वात्सल्य हमारे ऊपर लुटाते हैं। हमें जीवन देते हैं। पेड़ कार्बन डाई ऑक्साइड रूपी जहर लेकर हमें जीवन रुपी ऑक्सीजन देते है इसलिए यह नीलकंठ हैं। हमारे यहां प्रकृति पूजा का प्रावधान है। प्रकृति को भगवान मानते हैं। एक वैज्ञानिक ने कहा है कि धरती के बढ़ते तापमान और समुद्र के बढ़ते जल से 300 सालों में मुंबई का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। हम प्रकृति का दोहन कर सकते है, लेकिन उसका शोषण का अधिकार हमको नहीं है। इसलिए वृक्षारोपण जरूरी है।

दादा गुरु महाराज चमत्कारी संत हैं

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दादा गुरु महाराज के संबंध मे बोलते हुए कहा कि वे एक चमत्कारी संत और ऋषियों के महाऋषि हैं। इन्होंने साढ़े पांच साल से नर्मदा जल के अलावा कुछ भी ग्रहण नहीं किया। यह विज्ञान के लिए चुनौती है। 24 तारीख को 25 देशों के डॉक्टर्स आने वाले हैं, जो इनका परीक्षण करेंगे। दादा गुरु के कहने पर एक परीक्षण मैने भी करवाया था। 25 डॉक्टरों की टीम 24 घंटे इनके लिए जबलपुर के अस्पताल में लगवाई। वहां हर 3 घंटे में इनका परीक्षण होता था। गर्मी के दिनों 45 डिग्री तापमान में दादा गुरु 25 किलोमीटर दौड़ लगाते थे। तब चेक करने पर इनका शरीर स्वस्थ और सामान्य पाया जाता था, लेकिन इनका चेकअप करने वाले 25 में से 20 डॉक्टरों को लू लग गई और वे बीमार हो गए। अस्पताल में चारों तरफ कैमरे लगे थे, इनके कमरे में 20 कैमरे लगे थे। 8 दिनों यह परीक्षण चला। दादा गुरु दिन में 11 बजे केवल लंगोट में दौड़ने जाते थे और 1 बजे वापस आ जाते थे। नर्मदा जल में इतनी ताकत है कि आज दादा गुरु केवल उसके सेवन से स्वस्थ हैं।

दुनिया में केवल सनातन संस्कृति ही ऐसी है जो पेड़-पौधों को परमात्मा मानती है

इस अवसर पर उपस्थित दादा गुरु महाराज ने कहा कि गणेशोत्सव के अवसर पर वृक्षारोपण रूपी यह महायज्ञ किया जा रहा है, जो हमारे जीवन को सुरक्षित करेगा वहीं दूसरी तरफ संरक्षण और संवर्धन भी करेगा और साथ ही हमे आपदा, संक्रमण से भी सुरक्षा प्रदान करेगा। वृक्षारोपण रूपी यह महायज्ञ हमारे घर-परिवार की संपन्नता का आधार बनेगा। इस महायज्ञ का प्रारंभ उस वक्त हुआ जब मालवा की यह माटी तप रही थी उसी समय इस माटी में तपे एक सपूत को माँ ने खड़ा कर दिया जिसको आज कैलाश के रूप में देख रहे हैं। जब धरती तप रही थी तब एक बालक खड़ा हुआ जिसने मालवा को पहचान दी और आज वही बालक जिस माटी के तप से तपा है उस माटी के ताप को कम करने के लिए आगे बढ़ा है। हम सभी को इस वृक्षारोपण रूपी महायज्ञ में अपनी आहूति देना है। दुनिया में केवल सनातन संस्कृति ही ऐसी है जो पेड़-पौधों को परमात्मा मानती है और उनकी पूजा करती है। हम प्रकृति को देवता और शक्ति मानते हैं। आज दुनिया भर के लोग कह रहे हैं कि पेड़ों में सवेदना होती है, लेकिन हम हजारों सालों से उसकी संवेदनाओं को जानते हैं। इसलिए प्रकृति पूजा ने दुनिया में भारतवर्ष को एक विशिष्ठ स्थान दिलवाया है। आज धरती को बचाने के लिए सभी देश एक हो रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति में यह जमीन का टुकड़ा हो सकता है, लेकिन सनातन संस्कृति में यह हमारे जीवन का आधार है। श्रीकृष्ण ने माटी मुंह में रखकर माँ यशोदा को ब्रह्माण्ड के दर्शन करवा दिये थे। हमारे ऋषि-मुनियों ने कभी शक्ति का प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन शक्ति का दर्शन जरूर करवाया। सभी देश मिटाने की बात कर रहे है, लेकिन भारत बनाने की बात करता है। आज सारी दुनिया में प्रकृति की चिंता की जा रही है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि मालवा की माटी के सपूत कैलाश ने यहां से इसका सूत्रपात किया है। जिस तरह से किसी मठ-मंदिर का महत्व उसके अंदर स्थापित मूर्ति से है उसी तरह इस धरा का महत्व इन वृक्षों से है। जिस तरह शिव ने जटाओं में गंगा को धारण किया था उसी तरह यह वृक्ष अपनी जड़ों में जल को धारण करते हैं। मैं जब इंदौर आता हूं तो मेरा पड़ाव पितृ पर्वत पर रहता है मैं अब यह घोषणा करता हूं अब से मेरा दूसरा पड़ाव यहां ऋषि पर्वत पर रहेगा।

रेवती रेंज से मिली इस वृक्षारोपण की प्रेरणा

विधायक मधु वर्मा ने कहा कि पहले दतुनी पहाड़ पर बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की योजना थी, लेकिन वर्षा ना होने से इसको छोटे स्तर पर किया जा रहा है। वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम वर्षा ना होने से काफी समय से टाला जा रहा था, लेकिन कैलाश जी ने कहा कि अब इसको हम कर लेते हैं। इस पहाड़ी पर 1 लाख वृक्ष लगाने की योजना है। दतुनी पहाड़ी पुलिस प्रशासन का प्रशिक्षण केंद्र है यहां पर पुलिस को फायरिंग और शस्त्र प्रशिक्षण की ट्रेनिंग दी जाती है और यहां पर 3 सौ एकड़ से ज्यादा जमीन है और खाली पड़ी हुई थी। यहां पर पहले भी वृक्षारोपण हुआ है, लेकिन एक बड़े वृक्षारोपण की योजना हमने बनाई। रेवती रेंज से प्रेरणा लेकर यहां पर इस पहाड़ी को हरा-भरा करने की योजना बनाई गई। कैलाश जी को हमने अपने मन की बात बताई, कैलाश जी इस जगह का दौरा किया और फिर यहां पर वृक्षारोपण की योजना तैयार की गई। हम लोग पौधे लगाते हैं, लेकिन इन पौधों को बड़ा करने की चिंता राजेंद्र राठौर जी करते हैं। यहां पर पौधों की सिंचाई के लिए राजेंद्र जी ने एक मोटर लगवाई है और दो टैंकर दिए हैं। इस अवसर पर विधायक मधु वर्मा ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से अपील की कि राजेंद्र राठौर जी के लिए एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर हम उनके लिए राष्ट्रपति पुरस्कार की मांग करें। प्रदेश की कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर भेजें क्योंकि वो दुर्लभ कायर्कर्ता और समर्पित जनसेवक हैं।

पौधारोपण के संबंध में बताते हुए जनकार्य समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि आज से 51 हजार वृक्षारोपण का शुभारंभ हुआ है। इस वृक्षारोपण में 8 हजार से ज्यादा फलदार पौधों का रोपण किया गया है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर रामगोपाल दास, पदम श्री जनक पलटा, महंत लाल दासजी, डिप्टी कमांडेंट सुरेंद्र गौर, मंडल अध्यक्ष मुरली व्यास, नगर निगम, वन विभाग और पुलिस की टीम के अलावा भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आमजन उपस्थित थे। इससे पहले बुढ़ानिया पहाड़ी पर 51 हजार, कृषि महाविद्यालय में 15 हजार, रेवती रेंज पर 51 हजार ,वन विभाग की भूमि रमना पर 50 हजार, सुपर कॉरिडोर पर 21 हजार, नरवल इंडस्ट्रीयल एरिया में 5 हजार 1 सौ पौधे लगाए जा चुके हैं।

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