रवि बड़जात्या बाबू की रिपोर्ट इंदौर। शहर के मध्य क्षेत्र गोराकुंड में पेयजल प्रदाय की मुख्य पाइपलाइन अचानक फटने से बड़ा हादसा सामने आया है। पाइपलाइन से निकले पानी के तेज बहाव के कारण हाल ही में लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई स्मार्ट सिटी की सड़क धंस गई। सड़क के बीचों-बीच बने गहरे गड्ढे ने न केवल यातायात को ठप कर दिया, बल्कि नगर निगम के दावों और निर्माण कार्य में जारी कथित भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है।
करोड़ों का बजट, घटिया निर्माण: ज़िम्मेदार कौन?
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से तैयार की गई सड़क पहली ही पानी की लीकेज में ताश के पत्तों की तरह धंस गई। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इसे लेकर तीखा आक्रोश है। जनता सीधे तौर पर सवाल उठा रही है:
क्या निर्माण के दौरान तय मानकों की अनदेखी की गई थी?
बिना सही अर्थ-वर्क (मिट्टी की मजबूती जाँच) और गुणवत्ता जाँच के इतनी बड़ी राशि का भुगतान ठेकेदार को कैसे कर दिया गया?
क्या लीकेज जांचने और मजबूत बेस तैयार करने में अधिकारियों ने मिलीभगत से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया?
लाखों लीटर पानी बर्बाद, जलापूर्ति ठप
पाइपलाइन फूटने के कारण मिनटों में लाखों लीटर पीने का पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो गया, जिससे आसपास के कई व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलप्रदाय लाइन के रखरखाव में लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही थी, जिसकी परिणति इस बड़े हादसे के रूप में हुई।
कार्रवाई का इंतज़ार या फिर लीपापोती?
हादसे के बाद नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुँचकर मरम्मत का काम शुरू तो कर दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ठेकेदार और संबंधित इंजीनियरों पर केवल सड़क सुधारने का जिम्मा डालकर खानापूर्ति की जाएगी, या फिर इस वित्तीय अनियमिता और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी?


