Friday, October 23, 2026

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एक चीख और फरिश्ता बनी इंदौर की महिला पुलिसकर्मी, मौत के मुंह से खींच लाई 6 साल का मासूम

एक चीख और फरिश्ता बनी इंदौर की महिला पुलिसकर्मी, मौत के मुंह से खींच लाई 6 साल का मासूम

इंदौर (8 सितंबर 2026): मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक दिल दहला देने वाला लेकिन इंसानियत और बहादुरी की मिसाल पेश करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ साइबर सेल और डीसीपी जोन कार्यालय में पदस्थ एक महिला पुलिस आरक्षक (लेडी कांस्टेबल) निकिता जोशी एक 6 साल के मासूम बच्चे के लिए फरिश्ता बनकर आईं। निकिता ने अपनी सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए करंट की चपेट में आए बच्चे की जान एक क्रिकेट बैट की मदद से बचा ली।

चिल्लाने की आवाज सुनकर दौड़ीं निकिता

मिली जानकारी के मुताबिक, शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद निकिता जोशी अपने घर पहुँची थीं। तभी अचानक पास के एक मंदिर परिसर से बच्चों के जोर-जोर से रोने और चिल्लाने की आवाजें सुनाई दीं। किसी अनहोनी की आशंका में निकिता तुरंत दौड़ते हुए मौके पर पहुँचीं। मंदिर के पीछे झाड़ियों में एक 6 साल का बच्चा बेसुध पड़ा हुआ था और उसके हाथ में बिजली का नंगा तार था, जिससे उसे लगातार करंट लग रहा था।

क्रिकेट बैट से अलग किया बिजली का तार

बच्चे की जान दांव पर थी और समय बहुत कम था। निकिता ने बिना घबराए और बिना हिम्मत हारे तुरंत स्थिति को संभाला। उन्होंने पास में ही खेल रहे दूसरे बच्चों से क्रिकेट का लकड़ी वाला बैट लिया। सूझबूझ का परिचय देते हुए उन्होंने बैट की मदद से बच्चे के हाथ से चिपके बिजली के तार को झटके से अलग कर दिया।

तार हटते ही बच्चे को करंट से मुक्ति मिली, उसने अपनी आँखें खोलीं और रोते हुए कहा, “दीदी, मुझे अस्पताल ले चलो… नहीं तो मैं मर जाऊंगा, मेरा हाथ काम नहीं कर रहा है।”

गोद में उठाकर सीधे अस्पताल पहुँचीं

मासूम की हालत गंभीर देख निकिता ने बिना एक पल गंवाए और बिना एम्बुलेंस का इंतजार किए बच्चे को अपनी गोद में उठाया। परिजनों की मदद से वे उसे तुरंत पास के एक निजी अस्पताल लेकर भागीं।

डॉक्टरों और पुलिस विभाग ने सराहा

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अगर बच्चे को कुछ मिनटों की भी देरी हो जाती, तो उसकी जान बचाना नामुमकिन था। समय पर सही इलाज मिलने से बच्चे की जान पूरी तरह सुरक्षित है और उसके हाथ की मूवमेंट भी अब सामान्य हो गई है। इलाज के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया है।

अस्पताल के डॉक्टरों और मासूम के परिजनों ने महिला कांस्टेबल की तत्परता और बहादुरी की जमकर तारीफ की है। परिजनों ने हाथ जोड़कर निकिता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी वजह से उनके बच्चे को नया जीवन मिला है। इस जांबाजी पर एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने भी निकिता जोशी की सराहना की और उन्हें इस बहादुरी के लिए पुरस्कृत व सम्मानित किए जाने की घोषणा की है।

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