Saturday, October 17, 2026

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इंदौर के व्यापारियों का बड़ा एलान: UPI मर्चेंट फीस के खिलाफ आर-पार की लड़ाई; दुकानों पर पोस्टर अभियान शुरू, 10 लाख मोबाइल तक बात पहुंचाने का लक्ष्य

इंदौर के व्यापारियों का बड़ा एलान: UPI मर्चेंट फीस के खिलाफ आर-पार की लड़ाई; दुकानों पर पोस्टर अभियान शुरू, 10 लाख मोबाइल तक बात पहुंचाने का लक्ष्य

इंदौर (Ntvtime ब्यूरो): डिजिटल इंडिया के सबसे सफल माध्यम UPI पर मर्चेंट फीस लगाने के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर में व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। इंदौर के खुदरा और थोक व्यापारियों ने इस फैसले को व्यापार विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

आज सुबह से ही इंदौर के राजबाड़ा, क्लॉथ मार्केट, सियागंज और सराफा जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानों के बाहर ‘UPI मर्चेंट फीस वापस लो’ के पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही व्यापारी संगठनों ने इस अभियान को सोशल मीडिया के जरिए आम जनता और उपभोक्ताओं के 10 लाख मोबाइल स्क्रीन तक पहुंचाने का एक बड़ा डिजिटल टारगेट सेट किया है।

आज शाम को होगी बड़ी समीक्षा बैठक

आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आज शाम को इंदौर के प्रमुख व्यापारिक महासंघों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में डिजिटल कैंपेन की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और यह तय किया जाएगा कि क्या आने वाले दिनों में ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) या ‘सिर्फ नकद लेनदेन’ (Cash Only) जैसे कड़े कदम उठाए जाएं।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के खिलाफ है यह फैसला: NTWB

इस पूरे विवाद पर नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड (NTWB) के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने भी केंद्र सरकार से इस मर्चेंट फीस (MDR) को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • यह निर्णय सरकार की ही ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) की नीति के पूरी तरह विपरीत है।
  • छोटे और मध्यम स्तर के खुदरा व्यापार में मार्जिन पहले से ही बेहद सीमित है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापारियों का मुनाफा खत्म हो जाएगा।
  • भले ही यह शुल्क मर्चेंट्स पर लगाया जा रहा है, लेकिन लंबे समय में इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी।

क्या है नया UPI मर्चेंट फीस नियम?

व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम को दूर करने के लिए नियम इस प्रकार हैं:

  • आम जनता (P2P): एक आम नागरिक द्वारा दूसरे नागरिक को भेजे जाने वाले पैसे पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, यह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
  • छोटे मर्चेंट पेमेंट्स: ₹2,000 या उससे कम के व्यापारिक भुगतानों पर कोई चार्ज नहीं है।
  • बड़े मर्चेंट पेमेंट्स: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% MDR फीस लागू की जा रही है।
  • अधिकतम सीमा: बड़े ट्रांजैक्शंस पर लगने वाले इस शुल्क को अधिकतम ₹300 पर सीमित (Cap) किया गया है।

व्यापारियों का कहना है कि जब सरकार ने कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए खुद व्यापारियों को इसके लिए प्रेरित किया, तो अब ट्रांजैक्शन बढ़ने पर उन पर यह आर्थिक बोझ डालना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। आज शाम की बैठक के बाद इंदौर से उठने वाली यह आवाज देशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकती है।

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