Wednesday, October 7, 2026

TOP NEWS

7, 8 और 9...

इंदौर में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 7 से 9 अक्टूबर तक सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगेंगे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने नियमों को आसान करते हुए घोषणा पत्र की अनिवार्यता खत्म की है। पूरी खबर पढ़ें।

MP News: उज्जैन-इंदौर रोड...

उज्जैन-इंदौर रोड पर 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' की चलती बस में लगी भीषण आग। यात्रियों ने खिड़की से कूदकर बचाई जान। जानिए सुगम या सूत्र सेवा का पूरा विवाद।

8 सूत्रीय मांगों को...

( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )एनटीवी टाइम न्यूज पीथमपुर/ औद्योगिक शहर पीथमपुर में नगर...

अखिल भारत हिंदू महासभा...

अखिल भारत हिंदू महासभा ने सतीश दीक्षित को बनाया नगर उपाध्यक्षबीसलपुर। अखिल भारत...
Homeमध्य प्रदेशमप्र में 'Gen-Z' वोटर्स पर नजर: उज्जैन में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की 'धर्म...

मप्र में ‘Gen-Z’ वोटर्स पर नजर: उज्जैन में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘धर्म संसद’ तो इंदौर में राहुल की ‘छात्रों की गूंज’, मालवा बना सियासत का सुपर पावर सेंटर

मध्य प्रदेश की राजनीति में मालवा अंचल हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है, लेकिन इस समय इंदौर और उज्जैन के रूप में दो नए वैचारिक और राजनीतिक ‘पावर सेंटर’ उभरकर सामने आए हैं। एक तरफ जहां उज्जैन में दक्षिणपंथी विचारधारा युवाओं को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ इंदौर में विपक्ष युवाओं की बुनियादी समस्याओं को लेकर व्यवस्था विरोधी लहर तैयार करने की कोशिश कर रहा है। यह टकराव आगामी चुनावों से पहले युवा वोट बैंक (Gen-Z) को अपने पाले में करने की एक गहरी राजनीतिक बिसात है।

वैचारिक पिच का अंतर: ‘संस्कृति बनाम संकट’

उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय ‘युवा धर्म संसद’ के जरिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सत्तारूढ़ भाजपा ने राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण को केंद्र में रखा है. आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रियता यह साफ दर्शाती है कि भाजपा युवाओं को ‘नेशन फर्स्ट’ और सनातन गौरव की पिच पर एकजुट रखना चाहती है.

इसके ठीक विपरीत, महज 50 किलोमीटर दूर इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पूरी तरह से व्यावहारिक और व्यवस्था-केंद्रित मुद्दों पर आधारित है. कांग्रेस ने यहां धर्म या इतिहास के बजाय नीट (NEET) पेपर लीक, भर्ती घोटालों, बढ़ती फीस और बेरोजगारी को मुख्य हथियार बनाया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां उज्जैन का आयोजन युवाओं में ‘भावनात्मक और सांस्कृतिक’ जुड़ाव पैदा करने की कोशिश है, वहीं इंदौर का महासंवाद युवाओं की ‘आर्थिक और भविष्य की असुरक्षा’ को राजनीतिक गुस्से में बदलने की रणनीति है.

रणनीति और नैरेटिव की जंग

दोनों खेमों की सांगठनिक और प्रचार शैली में भी बड़ा अंतर दिखाई देता है:

  • भाजपा और संघ का संस्थागत ढांचा: उज्जैन में देश के 24 राज्यों से चुनकर आए 1600 से अधिक युवा प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य एक ऐसा कोर ग्रुप तैयार करना है जो जमीनी स्तर पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नैरेटिव को आगे बढ़ा सके.
  • कांग्रेस का हाईटेक यूथ आउटरीच: इंदौर में कांग्रेस ने पारंपरिक रैलियों के विपरीत नुक्कड़ नाटकों, सोशल मीडिया और डिजिटल रजिस्ट्रेशन (QR कोड) के जरिए सीधे ‘Gen-Z’ छात्रों से संपर्क साधा है. कोटा, प्रयागराज और पुणे के बाद इंदौर को चुनना यह दिखाता है कि राहुल गांधी देश के प्रमुख कोचिंग और एजुकेशन हब को निशाना बना रहे हैं.

प्रशासनिक रार और राजनीतिक नफा-नुकसान

इंदौर के कार्यक्रम को लेकर हुआ प्रशासनिक विवाद भी शुद्ध रूप से राजनीतिक है। पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की अनुमति न मिलना और बाद में कड़ी शर्तों के साथ भारत जोड़ो मैदान (रीजनल पार्क) की मंजूरी मिलना यह साफ करता है कि सत्ता पक्ष विपक्ष के इस युवा उभार को खुलकर स्पेस नहीं देना चाहता.

राजनीतिक दृष्टिकोण से, मालवा-निमाड़ क्षेत्र में जो भी दल युवाओं की नब्ज पकड़ने में कामयाब होता है, उसकी राह आसान हो जाती है। भाजपा जहां अपने पारंपरिक गढ़ में सांस्कृतिक ध्रुवीकरण और सरकारी उपलब्धियों के दम पर युवाओं को थामे रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस विरोधी लहर (Anti-incumbency) और छात्रों के असंतोष को भुनाकर राज्य की मोहन यादव सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी करने के प्रयास में है। यह समानांतर आयोजन केवल दो रैलियां नहीं, बल्कि देश के युवा मानस को जीतने की दो विपरीत राजनीतिक विचारधाराओं की सीधी भिड़ंत है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments