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केन्या नरसंहार: ‘स्वर्ग’ का झांसा देकर 190 बच्चों को भूखा मारने वाला पादरी पॉल मैकेंजी दोषी करार

केन्या नरसंहार: ‘स्वर्ग’ का झांसा देकर 190 बच्चों को भूखा मारने वाला पादरी पॉल मैकेंजी दोषी करार

केन्या की एक अदालत ने स्वयंभू पादरी पॉल मैकेंजी और उसके 28 सहयोगियों को 191 लोगों की सामूहिक हत्या का दोषी करार दिया है। मोम्बासा हाई कोर्ट की न्यायाधीश डायना कावेद्जा मोचाचे ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है। इस अंधविश्वास की वेदी पर चढ़ने वालों में 190 मासूम बच्चे और एक वयस्क शामिल थे। अदालत सभी दोषियों को 6 नवंबर 2026 को सजा सुनाएगी।

यह पूरा मामला केन्या के तटीय इलाके में स्थित ‘शाकाहोला जंगल नरसंहार’ (Shakahola Forest Massacre) के नाम से जाना जाता है, जहां अंधविश्वास के चलते 400 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

क्या है पूरा मामला और अंधविश्वास का खेल?

पॉल मैकेंजी ‘गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च’ का प्रमुख है। उसने साल 2019 में अपने अनुयायियों को मुख्यधारा के समाज से अलग कर दक्षिण-पूर्वी केन्या के शाकाहोला जंगल में बने एक विशाल आश्रम में बसा लिया था। मैकेंजी ने लोगों को दिमागी रूप से इस कदर गुलाम (Brainwash) बना लिया था कि वे उसकी हर बात को ईश्वरीय आदेश मानने लगे।

उसने अपने अनुयायियों के बीच यह अफवाह फैलाई कि दुनिया का अंत बेहद करीब है। उसने झांसा दिया कि यदि वे “यीशु (Jesus) से मिलना चाहते हैं और सीधे स्वर्ग में प्रवेश करना चाहते हैं”, तो उन्हें और उनके बच्चों को भूखे रहकर अपने प्राण त्यागने होंगे। मैकेंजी ने आधुनिक चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं और औपचारिक शिक्षा को ‘शैतानी’ करार देकर आश्रम में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था।

अदालत में बेनकाब हुआ ‘मौत का सुनियोजित तरीका’

सुनवाई के दौरान अदालत में यह साबित हुआ कि मैकेंजी ने आश्रम के भीतर भूख से मौत का एक बकायदा क्रूर पदानुक्रम (Hierarchy of Death) तैयार किया था। इस योजना के तहत:

  1. पहला शिकार: सबसे पहले मासूम बच्चों को भूखा रखकर मारना तय किया गया।
  2. दूसरा शिकार: बच्चों के बाद किशोरों और युवाओं को खाना देना बंद किया गया।
  3. तीसरा शिकार: इसके बाद महिलाओं और अंत में पुरुषों की बारी तय की गई थी।

गवाहों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को उनके माता-पिता के सामने ही भूखा रखा जाता था। अगर कोई बच्चा या अनुयायी भूख से तड़पकर खाना ढूंढने या जंगल से भागने की कोशिश करता, तो मैकेंजी के हथियारों से लैस पहरेदार (Guards) उन्हें क्रूरता से रोकते थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे

फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि शाकाहोला जंगल में मारे गए बच्चों की मौत सिर्फ भूख और कुपोषण से नहीं हुई थी। कई मासूमों को तब बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया जब उन्होंने भूख बर्दाश्त न होने पर विद्रोह करने की कोशिश की। कई बच्चों के शवों पर गला दबाने (Neck Compression), दम घुटने (Asphyxia) और सिर पर भारी वस्तु से हमला करने (Traumatic Head Injury) के निशान मिले, जो यह साबित करते हैं कि उन्हें जबरन मौत के मुंह में धकेला गया था।

कैसे हुआ था इस भयावह कांड का खुलासा?

इस दिल दहला देने वाले नरसंहार का राज अप्रैल 2023 में खुला। एक मानवाधिकार संगठन और स्थानीय नागरिक की गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने शाकाहोला जंगल में तलाशी अभियान शुरू किया। जब पुलिस वहां पहुंची, तो उन्हें कई लोग गंभीर रूप से कुपोषित और मरणासन्न हालत में मिले।

इसके बाद जब 800 एकड़ में फैले जंगल की खुदाई शुरू हुई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां उथली कब्रों में एक के बाद एक सैकड़ों शव दफनाए गए थे। एक कब्र खोदने वाले ने बताया कि कई कब्रों में बच्चों के शवों को एक के ऊपर एक कतार में लादकर दफनाया गया था। अब तक इस पूरे मामले में जंगल से 429 से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं।

पहले भी गिरफ्तार हुआ था मैकेंजी, लचर कानून का उठाया फायदा

केन्या में इस घटना के बाद से धार्मिक संगठनों और कल्ट (Cults) पर कड़े नियम लागू करने की मांग उठ रही है। जांच में सामने आया कि सरकारी तंत्र और खुफिया एजेंसियां इस खतरे को भांपने में पूरी तरह नाकाम रहीं। पॉल मैकेंजी का आपराधिक और कट्टरपंथी इतिहास पुराना रहा है:

  • साल 2017: उसे बच्चों को कट्टरपंथी बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वह बरी हो गया।
  • साल 2019: उसके आश्रम में दो बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद उसे फिर पकड़ा गया, लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गया और उसने अपना ठिकाना जंगल में बदल लिया।

आगामी सजा और अन्य कानूनी मुकदमे

अदालत ने मैकेंजी और उसके साथियों को 191 लोगों की हत्या का दोषी माना है, जिसके लिए उन्हें अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है। हालांकि केन्या में कागजी तौर पर मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन साल 1987 के बाद से वहां किसी को फांसी नहीं दी गई है।

इस हत्या के मुकदमे के अलावा पॉल मैकेंजी पर आतंकवाद (Terrorism), गैर-इरादतन हत्या (Manslaughter), और बच्चों को प्रताड़ित करने (Child Torture) से जुड़े कई अन्य अलग-अलग आपराधिक मुकदमे भी चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई जारी है। दूसरी तरफ, मैकेंजी के वकीलों का कहना है कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगे।

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