1 नवंबर मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष
मध्यप्रदेश ने विकसित भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में छलांग लगाई
डॉ. बी .आर .नलवाया ,मंदसौर
मध्यप्रदेश के 71 वें स्थापना दिवस पर प्रदेश की उपलब्धियों की समीक्षा करने का दिवस है। अब यह कहा जा सकता है, कि विकसित भारत की दौड़ में म.प्र. भी प्रगति के पथ पर चल रहा है। अब और अधिक ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। 10 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की तरक्की के आकड़े दिए कहा 2024 में कुल निर्यात 468 अरब डालर था, वह अब 824 अरब डॉलर है। वही मप्र का निर्यात 70 हजार करोड़ के पार हो गया, एक
साल में 4 पायदान की बढ़त ली है। इन्दौर, देवास और पीथमपुर औद्योगिक केंद्र से 11,968 करोड़ रु. का फार्मा निर्यात हुआ, जो सबसे बड़ा आयातक अमेरिका है। मप्र ने पिछले वर्ष निवेश आकर्षण और औद्योगिक प्रगति में जिस स्तर पर छलाग लगाई, वह देशभर के लिए मिसाल है। इसके पीछे उद्योगों के लिए औद्योगिक नीतियों में लचीलापन तथा आवश्यक संशोधन होने से विदेशी उद्यमी मध्य प्रदेश के प्रति आकर्षित हुए है। उद्योगो के लिए प्रदेश में 1.2 लाख एकड़ से ज्यादा लैंड-बैंक है, वही आज 112 से ज्यादा औद्योगिक विकसित क्षेत्र भी है। अब प्रदेश उधोग और रोजगार के क्षेत्र में अग्रणी बनने में अहम भूमिका निभा रहा है, स्पष्ट है कि 2003 में जहाँ प्रदेश में औधोगिक विकासदर-3-4 प्रतिशत थी, वहीं यह वर्तमान शासन
में यह 8-10 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2003-04 तक मध्य प्रदेश को एक बीमार राज्य की संज्ञा दी जाती रही। आज देश के सबसे विकसित प्रदेश के रूप में पहचान बना रहा है । बिजली सरप्लस राज्य बना है। अब प्रदेश बिजली क्षेत्र में पूर्णतया आत्मनिर्भर है। मध्य प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट लगातार आयोजित हो रही है। इससे मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखी गई , प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग संरचना का काफी विकास हुआ है। आगामी में वर्षों यह प्रदेश देश के उद्योग विकास में तीव्र गति से उपभरेगा करेगा।
मप्र पर्यटन नीति 2025 के अन्तर्गत मध्यप्रदेश गठन के शुभ अवसर पर पीएम श्री हवाई पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा प्रदेश में प्रमुख धार्मिक, वन्यजीव एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक और आकर्षक बनेगी । यह पहल मध्य प्रदेश को एक नए पर्यटन आयाम की ओर अग्रसर करेगी। जिससे राज्य के एडवेंचर, हेरिटेज टूरिज्म को नई पहचान भी मिलेगी । यही नहीं देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा का अनुभव और भी सुखद होगा। प्रदेश में पर्यटकों की प्रगति भी काफी रही है। 2025 में 21.05 करोड़ पर्यटक प्रदेश पहुंचे । घरेलू पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटक की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई 2025 में 1.83 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। वही उज्जैन में 2025 में 8.48 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ है।
मध्य प्रदेश गठन के बाद वर्ष 2003-04 तक प्रदेश में कुल 5 मेडिकल कालेज थे। वहीं आज प्रदेश में 30 मेडिकल कालेज हो गए, जिस में 17 है, और 13 निजी
क्षेत्र के है। आगामी वर्षों में 12 मेडिकल कॉलेज और तैयार हो रहे है।
इस के साथ ही आयुर्वेद के 5 मेडिकल कालेज शुरू भी कर रहे है।
पिछले 11 वर्षों देश सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रो में सड़को सड़कों का जाल बिछा है। 2003 में प्रदेश में 44 हजार किलोमीटर की सड़क थी , अब 3 लाख किलोमीटर से भी अधिक सड़कों का विस्तार हुआ है।
शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर शिक्षा के लिए प्रदेश में 369 सांदीपनी विद्यालय, 55 पी एम एक्सीलेंस कालेज तैयार किए गए है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत शैक्षणिक सत्र 2022-23 से हुई। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है । इन विद्यालयों के लिए 10,000 करोड़ की कार्य योजना बनाई गई ।2026- 27 में एक करोड़ 45 लाख छात्रों का नामांकन करने का लक्ष्य रखा गया है।
मप्र में वन्यजीव संरक्षण पर भी विशेष स्थान दिया जा रहा है। गत वर्ष 2025 में स्थापना दिवस पर 13 वां नेशनल पार्क ओंकारेशर में होगा। वही जो टाइगर रिजर्व वाले मध्य प्रदेश में 2022 की गणना के अनुसार 785 बाघ थे,जो देश में सर्वाधिक है। इस तरह मध्य प्रदेश वन्य जीवों के संरक्षण में भी देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है , क्योंकि यहां तेंदुआ चीता, घड़ियाल की मौजूदगी में भी प्रदेश नंबर वन पर है।
जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए जमीनी कदम उठाए गए। प्रदेश मे बहुउद्देश्यीय केन्द्र, ग्रामीण आवास, सड़कों का निर्माण, समग्र शिक्षा और विद्युतीकरण जैसे कामों
के लिए 1607 करोड़ रू का बड़ा प्रावधान किया गया है। देश में प्रदेश इस बात में भी अग्रणी है , कि आदिवासी समाज के लिए पैसा कानून बना है। प्रदेश के 20 आदिवासी जिलों में 5,133 ग्राम पंचायतों में पैसा एक्ट लागू हो चुका है।
डेयरी व पशुपालन के क्षेत्र सहकारी डेयरीयों का आधुनीकीकरण किया है। और कई नई दूध प्रसंस्करण इकाइयां शुरु की। दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढाकर 20 प्रतिशत से अधिक करने में प्रयास जारी।
प्रदेश में हर खेत तक पानी पहुंचे की उपाय में राज्य में सिंचाइ योग्य भूमि को 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर47 लाख हेक्टयर तक पहुंचाया जा रहा है। खेती के लिए उर्जा सबसे बड़ा संसाधन है, अगले 4 वर्षों में 40,000
किसानों को सोलर सिचाई पंप देने की योजना है। स्मरण रहे मध्य प्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड कई बार मिले हैं। उल्लेखनीय की वर्तमान में मध्य प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी को रोजगार कृषि पर आधारित है । 2019-20 में मध्य प्रदेश की जीडीपी में कृषि का योगदान 23.36 प्रतिशत था, जो 2036 में 30 प्रतिशत होने का अनुमान है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग आएंगे वहीं गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं 2015 में ,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत , की मध्य प्रदेश में इस दिशा में सबसे ज्यादा सजगता दिखाई, और 2019 में केंद्र द्वारा योजना में राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है ।
मध्य प्रदेश में पहला राज्य है जिसने बाल विवाह की रोकथाम के लिए 2013 में लाड़ो अभियान योजना प्रारंभ किया ।भारत सरकार द्वारा इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता देखते हुए वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश को सम्मानित किया गया। इस योजना में 2012-13 में बाल विवाह 42 प्रतिशत होते थे वहीं 2015-16 में 12 प्रतिशत रह गए।
मप्र के स्थापना दिवस पर प्रदेश की प्रगति कई क्षेत्रो में हुई। उक्त चुनीदा क्षेत्र की प्रगति लिखी गई है।
देश के पिछड़े एवं ऐसे ग्रामीण क्षेत्र जहां शुद्ध जल की समस्या थी।
वहां सब शुद्ध जल पहुंचने के लिए जल मिशन योजना की शुरुआत 2019 में हुई। इस योजना में प्रदेश में 60 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल शुद्ध उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश बुरहानपुर में नल से शुद्ध जल प्रदाय करने का पहला जिला तो निवाड़ी प्रदेश का दूसरा जिला बना, जिसे हर घर में नल कनेक्शन है।
मध्य प्रदेश में परंपरागत ताप व पन बिजली घर के साथ ही सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, लघु जल विद्युत ऊर्जा का पूरा संजाल है, तथा हर उपभोक्ता वर्ग की जरूरत के मुताबिक आपूर्ति को बेहतर नेटवर्क भी आकार ले चुका है । प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा के विकास का वर्णन संभव नहीं संक्षिप्त में मध्य प्रदेश सोलर एनर्जी के क्षेत्र में भी काफी प्रगति की है।
एक नंबर 1956 को मध्य प्रदेश जब अस्तित्व में आया था। तब विकास यात्रा आरंभिक दशकों में काफी धीमी रही। लेकिन अब प्रदेश में हर क्षेत्र में प्रगति की रफ्तार तेजी से बड़ी,यहां चुनिंदा क्षेत्रों की प्रगति का वर्णन किया हैं। मध्य प्रदेश देश का हृदय प्रदेश जाना जाता है।
केवल भौगोलिक क्षेत्र की दृष्टि से नहीं बल्कि अपनी बहुरंगी, बहुमुखी विशेषताओं के कारण देश के दिल की धड़कन भी है। आज यहां वन,खनिज, काल ,साहित्य, पर्यटन, शिल्प, कृषि और जल संपदा से संबंधित सम्राट प्रदेश है।
आशा है प्रगति होगी, परन्तु असली चुनौती. यह है कि इन वादों को जमीन पर उतारना और युवाओं को ठोस रोजगार दिलाना। प्रदेश के सारे निवेश प्रस्तावो को ठोस उद्योग, स्थायी रोजगार और टिकाऊ आर्थिक-सामाजिक विकास करना भी है।
डॉ. बीआर नलवाया , मंदसौर


