तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने वैश्विक स्तर पर अपने कार्यबल को पुनर्गठित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने भारत सहित चार देशों के करीब 60,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने (Voluntary Buyouts) का प्रस्ताव दिया है। यह संख्या माइक्रोसॉफ्ट के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 27% है।
कंपनी की चीफ पीपल ऑफिसर (CPO) एमी कोलमैन द्वारा जारी एक आधिकारिक मेमो के अनुसार, यह योजना भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के चुनिंदा विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराई गई है।
भारत के 23,000 कर्मचारियों के लिए अहम समयसीमा
माइक्रोसॉफ्ट में इस समय भारत के भीतर करीब 23,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत में कुल कितने कर्मचारी इस योजना के लिए पात्र (Eligible) माने जाएंगे, लेकिन भारतीय कार्यबल के लिए यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत में इस ऑफर के दायरे में आने वाले पात्र कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने के इस प्रस्ताव पर विचार करने और अपना अंतिम फैसला लेने के लिए 1 दिसंबर तक का समय दिया गया है।
नौकरी छोड़ने पर कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ
माइक्रोसॉफ्ट ने साफ किया है कि इस वॉलंटरी एग्जिट ऑफर (VEO) को चुनने वाले कर्मचारियों को वित्तीय सहायता और करियर ट्रांजिशन से जुड़ी सुविधाएं दी जाएंगी। यह पैकेज कंपनी की सामान्य छंटनी के दौरान मिलने वाले विच्छेद वेतन (Standard Severance Offer) के समान ही होगा।
इस योजना के तहत कर्मचारियों को नौकरी के हर पूरे किए गए एक साल के बदले 1 महीने का मूल वेतन (Base Salary) दिया जाएगा। इसके साथ ही, कंपनी की ओर से एक निश्चित अवधि के लिए मेडिकल और हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज भी जारी रहेगा। कर्मचारियों को नई नौकरियां तलाशने और नए करियर की योजना बनाने के लिए विशेष आउटप्लेसमेंट सपोर्ट दिया जाएगा, और उनके कार्यकाल के आधार पर शेयर या स्टॉक वेस्टिंग का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा।
कौन से विभाग हैं शामिल और किसे रखा गया है बाहर?
कंपनी के आंतरिक ग्रेड स्केल के अनुसार, यह ऑफर लेवल 70 और उससे नीचे के पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए है, जिसमें जनरल मैनेजर्स और कुछ वाइस प्रेसिडेंट (VP) रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।
कॉरपोरेट स्तर पर लागत घटाने और पुनर्गठन के लिए कोपायलट (Copilot), कोर-एआई (CoreAI), विंडोज + डिवाइसेस, एक्सबॉक्स (Xbox), फाइनेंस और एचआर (HR) जैसी टीमों को इस स्वैच्छिक एग्जिट प्रोग्राम में शामिल किया गया है। दूसरी तरफ, डेटा सेंटर्स, सेल्स (बिक्री), मार्केटिंग, कमर्शियल बिजनेस और सिक्योरिटी से जुड़ी कोर टीमों को इस बायआउट ऑफर से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
AI पर बढ़ते अरबों डॉलर के खर्च के बीच उठाया कदम
माइक्रोसॉफ्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है। कंपनी ने हाल ही में भारत में क्लाउड सेवाओं और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए 20.5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.95 लाख करोड़) के बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और नई तकनीकों पर बढ़ते पूंजीगत खर्च (Capex) के कारण ऑपरेटिंग लागत को संतुलित करने और कार्यबल की प्राथमिकताओं को बदलने के लिए तकनीकी कंपनियां इस तरह के स्वैच्छिक बायआउट प्रोग्राम का सहारा ले रही हैं। कंपनी के मुताबिक, यह कदम किसी छंटनी का विकल्प नहीं है, बल्कि उन कर्मचारियों को लचीलापन देने का प्रयास है जो माइक्रोसॉफ्ट के बाहर अपना नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं।


