Wednesday, October 7, 2026

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छात्रों की गूँज :राहुल के सामने फूटा इंदौर के छात्रों का दर्द, बोले– “हम मेहनत से नहीं, करप्ट सिस्टम से हारे हैं”

युवाओं का महाआक्रोश: राहुल के सामने फूटा इंदौर के छात्रों का दर्द, बोले– “हम मेहनत से नहीं, करप्ट सिस्टम से हारे हैं”

इंदौर। मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा एजुकेशन और कोचिंग हब ‘भंवरकुआं’ आज सड़कों पर था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत इंदौर के IDA ग्राउंड में एक ऐसा संवाद हुआ, जिसने देश की परीक्षा प्रणालियों की अंदरूनी हकीकत को बेनकाब कर दिया। अमूमन राजनीतिक रैलियों में नारेबाजी होती है, लेकिन यहाँ सिर्फ युवाओं की बेबसी, उनका गुस्सा और सिस्टम के खिलाफ तीखे सवाल गूंज रहे थे।

राहुल गांधी का आत्ममंथन: ‘कैंडिडेट्स को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी’

मंच से बात करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने व्यापम से लेकर NEET और हालिया पेपर लीक कांडों का जिक्र किया। लेकिन उन्होंने युवाओं को एक कड़वा आईना भी दिखाया। राहुल ने कहा, “यह सच है कि पूरा ढांचा कुछ चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए क्रैश कर दिया गया है। लेकिन कई बार परीक्षाओं में कैंडिडेट्स की भी गलती होती है। जब कुछ लोग शॉर्टकट ढूंढने की कोशिश करते हैं या सिस्टम की कमियों का फायदा उठाने की सोचते हैं, तो ईमानदार छात्रों का हक मारा जाता है। युवाओं को खुद इस करप्शन के खिलाफ अंदर से लड़ना होगा।”

छात्रों का पलटवार: ‘साहब, उम्र निकल रही है और पेपर लीक हो रहे हैं’

राहुल गांधी के इस बयान पर ग्राउंड में मौजूद छात्रों का दर्द छलक पड़ा। पीएससी (PSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने माइक हाथ में लेकर सीधे संवाद किया:

  • तैयारी के साल बर्बाद: छात्रों ने कहा कि वे 4-5 सालों से इंदौर के छोटे-छोटे कमरों में रहकर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार परीक्षा से पहले या बाद में स्कैम सामने आ जाता है।
  • करप्शन का चक्रव्यूह: युवाओं ने दोटूक कहा, “हम सिस्टम से हार चुके हैं। हम दिन-रात पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन उस पैसे और रसूख से कैसे लड़ें जो परीक्षा से एक रात पहले पेपर बाजार में बेच देता है?”

प्रशासनिक पहरे और नोटिस के साये में ‘गूंज’

यह कार्यक्रम सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि एक सियासी अखाड़ा भी बन चुका था। इंदौर प्रशासन ने इस कार्यक्रम को अनुमति देने के लिए 31 बेहद सख्त शर्तें रखी थीं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय हॉस्टलों और कोचिंग संचालकों पर अंदरूनी दबाव बनाया गया था ताकि छात्र इस रैली में शामिल न हों। इसके बावजूद, हजारों की संख्या में Gen-Z और युवाओं ने मैदान में पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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