राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT ने शासन को सौंपी फाइनल जांच रिपोर्ट, ट्रस्टियों को राहत, 8 आरोपी पहले से जेल में
गौरव जोशी
अयोध्या: भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे) में हुई सेंधमारी के चर्चित मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, दाखिल की गई इस रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं है, जिससे दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। वहीं, इस मामले में नामजद बाकी 8 आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
ट्रस्टियों की भूमिका पर नहीं मिले सबूत
चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया था। निष्पक्ष जांच के लिए गठित SIT ने दान-पात्रों के प्रबंधन, नकदी की गिनती की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से पड़ताल की। जांच टीम ने ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों, बैंक कर्मियों और सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद SIT इस निष्कर्ष पर पहुंची कि वित्तीय विसंगतियों या चोरी में ट्रस्टियों की सीधे तौर पर कोई संलिप्तता नहीं थी।
सुरक्षा लूपहोल का फायदा उठाकर हुई थी चोरी
SIT की रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि चढ़ावा गिनने और उसे जमा करने के दौरान सुरक्षा तंत्र की ढिलाई का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया गया। गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में मुख्य रूप से चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी और सहयोगी शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया था कि ये आरोपी गिनती के वक्त चालाकी से नकदी पार कर देते थे।
मंदिर सुरक्षा और दान प्रबंधन में बदलाव की सिफारिश
शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में केवल आरोपियों की भूमिका का ब्योरा ही नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े सुझाव भी दिए गए हैं। SIT ने सिफारिश की है कि:
डिजिटल ट्रैकिंग: चढ़ावा संग्रह से लेकर बैंक जमा तक पूरी प्रक्रिया को हाई-टेक सीसीटीवी और डिजिटल ट्रैकिंग के दायरे में लाया जाए।
बायोमेट्रिक एक्सेस: दान-पात्र खोलने और नकदी की गिनती वाले कक्षों में केवल अधिकृत कर्मियों को ही बायोमेट्रिक एंट्री दी जाए।
थर्ड-पार्टी ऑडिट: दान प्रबंधन की हर महीने स्वतंत्र एजेंसी से नियमित स्क्रूटनी कराई जाए।
मामले की रिपोर्ट शासन तक पहुंचने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ अदालत में सख्त चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी पूरी कर ली गई है, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।


