UNGA में बोले पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ- भारत ने पानी रोका तो भुगतेगा अंजाम, कश्मीर हमारी शह रग
न्यूयार्क/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ एक बार फिर जहर उगला है। वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने भारत को सीधे तौर पर ‘जंग की धमकी’ दे डाली। शहबाज शरीफ ने कहा कि सिंधु जल संधि के तहत आने वाली नदियों के पानी को रोकने या उसका रुख मोड़ने की भारत की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) के रूप में देखेगा। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘शह रग’ (गले की नस) बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में दखल देने की मांग की।
अपने आक्रामक संबोधन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने दावा किया कि नदियाँ देशों को आपस में जोड़ने का माध्यम हैं, इसलिए इन्हें एक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले को पूरी तरह अवैध बताया। शरीफ ने शर्त रखी कि जब तक नई दिल्ली इस फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक द्विपक्षीय बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत की तरफ से कोई सैन्य दुस्साहस किया गया, तो परमाणु संपन्न पाकिस्तान उसका सबसे कड़ा जवाब देगा।
पाकिस्तान के इस भड़काऊ भाषण पर भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में बेहद सख्त रुख अपनाया। अपने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए भारतीय राजनयिकों ने पाकिस्तान को आईना दिखाया। भारत ने दो टूक कहा कि जिस देश की पहचान ही दुनिया भर में आतंकवाद के मुख्य केंद्र के रूप में हो, उसे शांति और अधिकारों पर बात करने का कोई नैतिक हक नहीं है। भारतीय दल ने वैश्विक मंच पर स्पष्ट किया कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को भारत अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा और पाकिस्तान को अपनी सरजमीं पर चल रहे आतंकी कैंपों को तुरंत बंद करना होगा।
कश्मीर के मुद्दे पर हमेशा की तरह अपना रुख साफ करते हुए भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं, और इनमें किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की इस नई छटपटाहट की असली वजह भारत द्वारा 1960 की सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए भेजा गया हालिया नोटिस है। भारत पर्यावरण में आए बदलावों और सीमा पार आतंकवाद के मौजूदा खतरों को देखते हुए इस दशकों पुरानी संधि के नियमों को दोबारा तय करना चाहता है, जिससे घबराकर पाकिस्तान अब वैश्विक मंचों पर युद्ध की गीदड़भभकी देने लगा है।


