Friday, October 16, 2026

TOP NEWS

धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट...

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने पर सीधे मुस्लिम पिछड़ा वर्ग (BCM) कोटे के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज।

BSA Gold Star 650...

BSA Gold Star 650 के दो नए स्पेशल एडिशन भारत में लॉन्च हो गए हैं। जानें बर्मिंघम ब्लू और ब्रुकलैंड्स ब्लैक लेगेसी वेरिएंट्स की नई कीमतें, 4 साल की वारंटी और दमदार स्पेसिफिकेशन्स की पूरी डिटेल।

SIR विवाद के बीच...

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने यूपी-एमपी समेत 17 राज्यों में वोटर लिस्ट अपडेट (SSR) करने का दिया आदेश. 1 जनवरी 2027 होगी कट-ऑफ तारीख, जानें क्या बदलेंगे नियम.

शाहपुरा जनपद के पंचायत...

डिंडौरी। जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पंचायत सचिव मनोहर आर्मो...
Homeमध्य प्रदेशशिवपुरी : इसे मर जाने दो यह जीकर क्या करेगी?, कुपोषण से...

शिवपुरी : इसे मर जाने दो यह जीकर क्या करेगी?, कुपोषण से शिवपुरी में लड़की की मौत

एनटीवी टाइम न्यूज/शिवपुरी में कुपोषण से 1 साल की लाडो की मौत, मृतका की मां ने सास-पति और देवर पर इलाज ना करने का लगाया आरोप.

शिवपुरी: आज बेटियां भले ही जमीन से लेकर आसमान तक बुलंदी के झंडे गाड़कर अपने देश का नाम रौशन कर रही हैं. लेकिन समाज में कई वर्ग और परिवार ऐसे हैं, जो बेटियों को आज भी अभिशाप मानते हैं. ऐसा ही एक उदाहरण शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी में सामने आया है. यहां एक मासूम बच्ची दिव्यांशी पुत्री लाखन धाकड़ उम्र 1 साल 3 माह का उसके स्वजनों ने इलाज नहीं कराया. जिसकी वजह से वह बीमार होकर कुपोषण का शिकार हो गई और शनिवार को जिला अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गई.

बच्ची का परिजनों ने नहीं कराया इलाज

इस पूरे मामले में सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर का कहना है कि “बच्ची को 1 अगस्त को दस्तक अभियान के तहत चिंहित किया गया. स्वजनों को इस बात के लिए समझाया गया कि वह बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दें, लेकिन उसके परिवार वाले उसे अस्पताल में भर्ती करवाने को तैयार नहीं हुए. इसके बाद सरपंच से संपर्क कर मोहल्ले, पड़ोस के लोगों की पंचायत बुलवा कर दिव्यांशी के स्वजनों को समझाइश दी गई. इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसके परिवार वाले उसे अस्पताल से लेकर घर भाग गए. शनिवार को बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.”

5 महीने से अपने मायके में बिहार थी मां

सीएमएचओ ने कहा, “बच्ची की मां खुशबू उसे लेकर पांच माह पहले अपने मायके चली गई थी. वहां से लौटकर आई तो 1 अगस्त को बच्ची को चिंहित किया गया. 4 अगस्त को उसे सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया. 5 अगस्त को सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र से बच्ची को जिला अस्पताल रेफर किया गया. यहां पीआईसीयू वार्ड में उसका उपचार चला. इसके बाद बच्चे को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. वहां 7 अगस्त तक तक बच्ची का उपचार चला और हालत स्थिर हो गई. मेडिकल कॉलेज से बच्ची को एनआरसी ले जाने की सलाह देकर डिस्चार्ज किया गया, लेकिन दिव्यांशी के स्वजन उसे एनआरसी ले जाने की बजाय वापस गांव ले गए. वहां बच्ची की तबीयत फिर से खराब हो गई.”

  • बच्ची की उम्र 1 साल 3 माह
  • बच्ची का वजन 3.700 ग्राम
  • बच्ची का हिमोग्लोबिन 7.4 ग्राम
  • एमयूसी टेप से माप 6.4 सेमी

ये लड़की है इसे मर जाने’

मासूम की मां खुशबू धाकड़ ने कहा, “मेरी सास को बेटी पसंद नहीं थी, जब मैंने बेटी को जन्म दिया तो उन्होंने मुझे और अधिक प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. बेटी बीमार होती तो उपचार करवाने से यह कहकर इंकार कर देती कि लड़की है इसे मर जाने दे. मेरी सास को कोई समझाता था, तो वह समझने को तैयार नहीं होती. पति और देवर से इलाज के लिए कहती तो वे मुझे मारते थे.”

नारायण शर्मा
नारायण शर्मा
एन टी वी टाइम न्यूज में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments