अमृत सरोवर, चेकडैम, मिनी परकुलेशन टैंक और सीसी सड़क निर्माण में लाखों रुपये की गड़बड़ी के आरोप; फर्जी बिल-वाउचर से राशि आहरण की शिकायत, 21 कार्य दिवस में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश*
शहपुरा, डिंडौरी। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरैया में विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायत पर जांच में देरी का मामला सामने आया है। शिकायत में अमृत सरोवर, गेबियन स्ट्रक्चर, मिनी परकुलेशन टैंक, चेकडैम, सीसी सड़क और स्वागत द्वार सहित कई निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही फर्जी बिल-वाउचर के माध्यम से शासकीय राशि आहरित किए जाने की आशंका जताते हुए संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की गई है।
मामले में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होने पर शहपुरा एसडीएम ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को पुनः स्मरण पत्र जारी किया है। 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में 21 कार्य दिवस के भीतर स्पष्ट एवं बिंदुवार जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पंचायत के निर्माण कार्यों और शिकायत पर की जा रही जांच को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
* अमृत सरोवर निर्माण पर 42.15 लाख रुपये खर्च का उल्लेख*
शिकायत में अमृत सरोवर निर्माण पर लगभग 42.15 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने के साथ उसकी वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और संबंधित भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
इसी तरह गेबियन स्ट्रक्चर निर्माण पर करीब 4.80 लाख रुपये तथा अतिरिक्त 7.20 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख करते हुए स्वीकृति, तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, मिनी परकुलेशन टैंक निर्माण पर लगभग 12.40 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा वर्ष 2019-20 में करीब 19 लाख रुपये की लागत से एक अन्य मिनी परकुलेशन टैंक निर्माण का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन सभी कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और वर्तमान भौतिक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग उठाई है।
*चेकडैम निर्माण की गुणवत्ता और उपयोगिता पर सवाल*
गुरैया पंचायत में नाले सहित अन्य स्थानों पर निर्मित चेकडैम भी शिकायत के दायरे में हैं। शिकायत में एक चेकडैम पर लगभग 22 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख करते हुए निर्माण की गुणवत्ता, उपयोगिता और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्यों में व्यय की गई राशि का वास्तविक कार्यों से मिलान होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृत राशि के अनुरूप निर्माण हुआ है या नहीं।
*सड़क और स्वागत द्वार निर्माण में भी जांच की मांग*
ग्राम पंचायत में स्वागत द्वार निर्माण पर लगभग 4.80 लाख रुपये, सीसी सड़क निर्माण पर करीब 3 लाख रुपये तथा साठिया टोला में सीसी सड़क निर्माण पर लगभग 1.60 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, निर्माण गुणवत्ता, मौके पर उपलब्ध संरचनाओं और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने संबंधित दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक व्यय और निर्माण कार्यों की स्थिति का मिलान कराने पर जोर दिया है।
*फर्जी बिल-वाउचर से राशि आहरण के आरोप*
शिकायत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पंचायत के कुछ निर्माण कार्यों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बिल-वाउचर अथवा अन्य दस्तावेजों के आधार पर शासकीय राशि का आहरण किया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता ने सप्लायरों के बिल, भुगतान विवरण, मस्टर रोल और अन्य संबंधित अभिलेखों का परीक्षण कराने की मांग की है। इसके साथ ही सरपंच, सचिव और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने तथा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने संबंधी लगाए गए आरोपों की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
*21 कार्य दिवस में रिपोर्ट देने के निर्देश, अब कार्रवाई का इंतजार*
गुरैया पंचायत के निर्माण कार्यों को लेकर प्रस्तुत शिकायत और जांच प्रतिवेदन में देरी के बीच एसडीएम द्वारा जारी स्मरण पत्र ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय पर टिकी हैं कि निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाता है या नहीं।
जांच में निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन, स्वीकृत राशि और वास्तविक व्यय का मिलान, भुगतान अभिलेखों की पड़ताल तथा कथित बिल-वाउचर की सत्यता की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच प्रतिवेदन सामने आने और संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट लीलाराम साहू डिंडोरी



