Monday, August 17, 2026

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म्यूचुअल फंड में एसआईपी शुरू करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें, वरना होगा भारी नुकसान

म्यूचुअल फंड में एसआईपी शुरू करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें, वरना होगा भारी नुकसान

आज के समय में हर कोई अपने पैसे को सही जगह निवेश करके बड़ा फंड बनाना चाहता है। फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स अकाउंट में मिलने वाले कम ब्याज के कारण, आजकल युवाओं के बीच म्यूचुअल फंड में एसआईपी निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया बन चुका है।

लेकिन, बिना पूरी जानकारी के किसी भी म्यूचुअल फंड में पैसा लगा देना आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

आज हम आपको उन 5 महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताएंगे, जिन्हें एसआईपी शुरू करने से पहले जानना बेहद जरूरी है।

1. डायरेक्ट प्लान बनाम रेगुलर प्लान का फर्क

समझेंम्यूचुअल फंड में निवेश के दो विकल्प होते हैं। अक्सर लोग अनजाने में रेगुलर प्लान चुन लेते हैं, जिससे उनका मुनाफा कम हो जाता है।डायरेक्ट प्लान में आप सीधे फंड हाउस से म्यूचुअल फंड खरीदते हैं। इसमें कोई डिस्ट्रीब्यूटर या ब्रोकर कमीशन नहीं होता, जिससे इसका एक्सपेंस रेशियो कम होता है और आपको 1 से 2 परसेंट तक ज़्यादा रिटर्न मिलता है।रेगुलर प्लान में आप किसी एजेंट या ब्रोकर के जरिए निवेश करते हैं। ब्रोकर का कमीशन आपके ही फंड से कटता है, जिससे लॉन्ग टर्म में लाखों का नुकसान हो सकता है। इसलिए हमेशा डायरेक्ट प्लान का ही चुनाव करें।2. फंड का एक्सपेंस रेशियो जरूर चेक करें

म्यूचुअल फंड को मैनेज करने के लिए एसेट मैनेजमेंट कंपनियां एक सालाना फीस लेती हैं, जिसे एक्सपेंस रेशियो कहा जाता है।यह फीस आमतौर पर 0.10 परसेंट से लेकर 2.25 परसेंट तक हो सकती है। जितना कम एक्सपेंस रेशियो होगा, आपका मुनाफा उतना ही अधिक होगा। निवेश करने से पहले हमेशा दो समान फंड्स के एक्सपेंस रेशियो की तुलना जरूर कर लें।

3. एग्जिट लोड और टैक्स के नियम

पैसे निकालने से पहले आपको फंड के एग्जिट लोड और टैक्स के बारे में पता होना चाहिए। कई म्यूचुअल फंड्स में अगर आप निवेश करने के 1 साल के भीतर अपनी एसआईपी का पैसा निकालते हैं, तो कंपनी 1 परसेंट तक का जुर्माना वसूलती है, जिसे एग्जिट लोड कहते हैं।इसके अलावा 1 साल से पहले पैसा निकालने पर 20 परसेंट का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, 1 साल के बाद निकालने पर放置 लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है, जिसमें सालाना सवा लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है।

4. अपनी रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से फंड चुनें

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, इसलिए आपको अपनी उम्र और लक्ष्य के हिसाब से सही कैटेगरी का चयन करना चाहिए।

लार्ज कैप फंड्स में जोखिम कम होता है क्योंकि पैसा देश की टॉप 100 बड़ी कंपनियों में लगता है। नए निवेशकों के लिए यह सुरक्षित विकल्प है।

मिड और स्मॉल कैप फंड्स में जोखिम बहुत अधिक होता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यानी 7 से 10 साल में यह लार्ज कैप के मुकाबले कहीं ज़्यादा रिटर्न दे सकते हैं।

5. मार्केट टाइमिंग के चक्कर में न पड़ें

कई लोग सोचते हैं कि जब शेयर बाजार गिरेगा, तब वे एसआईपी शुरू करेंगे। म्यूचुअल फंड में मार्केट को टाइम करना सबसे बड़ी भूल है।

एसआईपी का असली फायदा रुपी कॉस्ट एवरेजिंग से मिलता है। जब मार्केट गिरता है, तो आपको उतने ही पैसों में ज़्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो मार्केट उठने पर भारी मुनाफा देती हैं।

एक छोटा उदाहरण

यदि आप 5,000 रुपये महीना की एक एसआईपी शुरू करते हैं और आपको औसतन 15 परसेंट का सालाना रिटर्न मिलता है, तो अगले 20 सालों में आपका निवेश 12 लाख रुपये होगा, लेकिन कंपाउंडिंग की मदद से इसकी कुल वैल्यू लगभग 65 लाख 79 हजार रुपये हो जाएगी।

निष्कर्ष

म्यूचुअल फंड में एसआईपी अमीर बनने का एक बेहतरीन और अनुशासित जरिया है। निवेश शुरू करने से पहले हमेशा फंड के पुराने 5 साल के रिकॉर्ड, फंड मैनेजर के अनुभव और ऊपर बताई गई 5 बातों को ध्यान में रखें। कभी भी केवल पिछले 1 साल का रिटर्न देखकर बड़ा निवेश न करें।

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