12 अगस्त विश्व हाथी दिवस पर विशेष
संवेदनशील प्राणी “हाथी” के साथ मजाक एवं क्रूरता महंगी पड़ेगी
अति प्राचीन काल से हमारी यह धारणा रही है, कि संसार में भावनाएं सिर्फ मनुष्य में ही पाई जाती है, किंतु बाद में पता चला की भावनाएं केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि जानवरों में भी होती है। फिर जैसे-जैसे विज्ञान ने विकास किया एवं पेड़ पौधों पर अध्ययन किए गए तो पेड़ पौधों में भी भावनाओं और और उनमें जीव का पाया जाना स्पष्ट हो गया। अब यह तयशुदा बात है, कि भावनाएं अथवा संवेदनशीलता सभी प्राणियों में पाई जाती है।
आपने भी कई बार अपने आसपास उपस्थित जानवरों में भावनाओं को महसूस किया होगा, कभी अपने पालतू जानवर को अपनों से बिछड़ने पर रोते हुए देखा होगा। जानवरों में कौन कितना अधिक भावुक है इसकी व्याख्या कुछ वर्षों पूर्व अमेरिका की विलियम एंड मैरी कॉलेज की मानव विज्ञान की प्रोफेसर बारबरा किंग ने अपनी एक पुस्तक “हाउ एनिमल्स ग्रीव” में की है। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने जानवरों की अनेक प्रजातियों पर किए गए अध्ययन को लोगों के साथ शेयर किया है।
आज 12 अगस्त हाथी दिवस पर हाथी के चरित्र पर एक विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है, उनकी व्याख्या बताती है, कि दुख व्यक्त करने में हाथी सबसे अधिक भावुक जानवर है। किताब में उन्होंने जानवरों की अनेक प्रजातियों के द्वारा अपनों से बिछड़ने के शौक को व्यक्त करने के तरीकों का वर्णन किया है, जिसमें हाथी द्वारा भावनाएं प्रकट करने का तरीका अचरज भरा था। उन्होंने बताया कि हाथी के शव को रेत में छोड़ दिए जाने पर पाया गया कि हाथियों के पांच अलग-अलग परिवार उस हाथी के शव के पास आए और सभी ने अलग अलग तरीके से अपनी भावनाएं व्यक्त की। किसी ने शव के चारों ओर चक्कर लगाकर दुख व्यक्त किया तो किसी ने चुपचाप उसके पास खड़े रहकर तो किसी ने अन्य तरीके से सूंड उठाकर अपनी अपनी संवेदना प्रकट की। बारबरा का कहना है कि वे यह नहीं मानती कि जानवरों का शोक प्रकट करने का तरीका इंसानों की तरह का है किंतु कुछ प्रजातियों में दुख व्यक्त करने की भावनाएं वास्तविक होती है।
राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने गज उत्सव 2023 के उद्घाटन के अवसर पर असम स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क में एक हाथी को पुचकारा और उसे केला खिलाया। उन्होंने बताया कि मानव हाथी संघर्ष का गहन विश्लेषण किया जाए , तो स्पष्ट होता है कि हाथियों के प्राकृतिक गलियारों में अवरोध है, इसके लिए मनुष्य जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि लोगों को हाथियों के साथ दया का व्यवहार करना चाहिए। हाथी हमारा राष्ट्रीय विरासत पशु है. l इसकी रक्षा करके हम अपनी राष्ट्रीय विरासत की रक्षा कर सकते हैं। हाथी झुंड में रहते हैं, और यदि किसी एक हाथी पर भी मुसीबत आती है ,तो दूसरे उसकी मदद करते हैं। मनुष्यों को इससे सीख लेनी चाहिए।
विगत वर्षों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें जंगल में एक हाथी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, एवं उसके आगे चल रही एक विदेशी लड़की अपने एक हाथ में केले का एक पूरा डंकल और दूसरे हाथ में केला लेकर हाथी को खिलाने की कोशिश कर रही थी। लड़की केला खिलाने के लिए हाथी को आगे बुला रही थी, उसका यह वीडियो कोई मोबाइल कैमरे में शूट कर रहा था। वह लड़की हाथी को अकेला दिखा कर बार-बार आगे बुलाने के लिए प्रेरित तो करती रही, परंतु केला नहीं खिलाया। लड़की की इस हरकत से हाथी क्रोधित हो गया और उसने अपनी सूंड से लड़की पर हमला करके लड़की को थोड़ी दूर गिरा दिया और उसे चोट भी आई।
स्पष्ट है कि एक हाथी को लोग मूर्ख नहीं बना सकते, भले ही वह पालतू हो। कैद में रहने वाले सबसे बुद्धिमान जानवर में हाथी प्रमुख है। हाथी मनुष्य की गंध को 3000 फीट दूर से भी महसूस कर लेता है। हाथी जब मद में आता है तो उसे संभालना बहुत कठिन हो जाता है। कुछ हाथियों को संभालने के मामले में 64 वर्ष की उम्र में भी डॉक्टर कुशलकुंवर शर्मा का विश्व कीर्तिमान स्थापित है। वह कहते हैं कि हाथी को संभालना है ,तो उसके मुड़ को भांपना बहुत जरूरी है। हाथी कोई मशीन नहीं है, बल्कि एक जीव है। आप उसके साथ जैसा पेश आएंगे बदले में वह भी वैसा ही बर्ताव करेगा। हाथी बहुत संवेदनशील जीव है, जो आप की क्रिया को देखकर सब कुछ भांप जाता है।
हाथी भी उन प्रजातियों की सूची में सम्मिलित है जिनके विलुप्त होने का खतरा है। दक्षिण एशिया में अभी करीब 48000 हाथी है ,और इनमें से 27000 हाथी अकेले हमारे देश में है। इतनी बड़ी तादाद में हाथी हमारे पास है। लेकिन हमारे संरक्षित वन कम हो रहे हैं, मानव जाति की संख्या बढ़ रही है, वहीं जंगल सिकुड़ते जा रहे हैं।
हाथी झुंड में रहते हैं एवं हाथीयों की टोली का नेतृत्व नर हाथी नहीं बल्कि मादा हथिनी करती है। हाथी परिवार में सत्ता नर कि नहीं बल्कि मादा की होती है। वहीं अपने परिवार की मुखिया होती है। हाथी लंबी दूरी पर मौजूद अपने झुंड के हाथी और दूसरे झुंडों के हाथियों से संपर्क रखते हैं। हाथी कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाज निकालते हैं जिसे इंसान सुन नहीं पाते। जंगली हाथी की औसत उम्र 45 से 60 वर्ष व पालतू हाथियों की औसत उम्र 70 से 80 वर्ष की होती है। हाथी की सूंड में 40000 मांसपेशियां होती है। सूंड की नोक से हाथी सुई भी उठा सकता है। हाथी की सूंड के विविध उपयोग होते हैं जिसमें सूँघना,पानी पीना, भोजन ग्रहण करना, नहाना आदि शामिल है।
हाथी एक ऐसा जानवर है जो कभी कूद नहीं सकता, परंतु हाथी को जल क्रीड़ा में बहुत आनंद आता है। हाथी एक विशुद्ध शाकाहारी प्राणी है और मांसाहार से सदैव दूर रहता है। वृक्षों की छाल, फल, गन्ना हाथी को विशेष प्रिय होता है और नमक हाथी का पसंदीदा भोजन कहा गया है। हाथी एक दिन में 190 लीटर पानी पीता है जो कि उसे जल के किसी भी खुले स्त्रोत से मिल जाता है। हाथी धरती का सबसे विशाल प्राणी है एवं उनकी स्मरण शक्ति भी अन्य जानवरों से काफी अधिक है। अब इंसान को यह समझना आवश्यक है कि हाथी काफी विनम्र एवं शांत स्वभाव वाला एक भोला प्राणी है, यदि मनुष्य इसके साथ क्रूरता करता है, तो उसके परिणाम भी उसे भुगतने पड़ेंगे। आज हम निर्णय करें कि हाथी दिवस पर हाथी के साथ कोई कुरर्ता या मजाक नहीं करेंगे।
डॉ. बी.आर. नलवाया, पूर्व प्राध्यापक-वाणिज्य,मंदसौर


