Tuesday, September 29, 2026

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BREAKING NEWS: जम्मू-कश्मीर के...

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बड़ा हादसा। बसोली के सेवा पावर प्रोजेक्ट स्थित CISF कैंप में जवानों के बीच आपसी विवाद में हुई अंधाधुंध गोलीबारी। असिस्टेंट कमांडेंट और इंस्पेक्टर समेत 5 जवानों की मौत की खबर। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

इंदौर में बड़ी वारदात:...

इंदौर के सदर बाजार में सनसनीखेज वारदात: पूर्व जिलाबदर बदमाश शुभम जाट ने खुद को घायल करने के बाद पुलिसकर्मी पवन पर चाकू से किया जानलेवा हमला। घायल पुलिसकर्मी की हालत गंभीर, सेल्बी अस्पताल में इलाज जारी। पूरी खबर पढ़ें।

बालाघाट में बच्चों की...

राहुल गांधी 1 अक्टूबर को एमपी के बालाघाट जाएंगे। 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत पर उन्होंने मोहन यादव सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार सोती रही

एशियन गेम्स 2026: भारतीय...

एशियन गेम्स 2026 में भारत का कमाल! महिला 4x400 मीटर रिले में जीता छठा गोल्ड मेडल। धावक गुलवीर सिंह ने हैट्रिक लगाकर रचा इतिहास, भारत के 50 से पार हुए पदक।
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15 अगस्त से जुड़े 5 ऐसे ऐतिहासिक तथ्य, जो शायद आपको स्कूल की किताबों में नहीं मिले

15 अगस्त से जुड़े 5 ऐसे ऐतिहासिक तथ्य, जो शायद आपको स्कूल की किताबों में नहीं मिले

फैक्ट 1: 15 अगस्त को कोई राष्ट्रगान नहीं था:

जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, तब हमारा अपना कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित ‘जन गण मन’ को साल 1950 में आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान घोषित किया गया था।

फैक्ट 2: नेहरू जी का पहला भाषण
जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ (Tryst with Destiny) 14 अगस्त की आधी रात को संविधान सभा से दिया था, न कि 15 अगस्त की सुबह लाल किले से।

फैक्ट 3: 15 अगस्त को आज़ाद होने वाले अन्य देश:

भारत के अलावा दुनिया के 5 और ऐसे देश हैं जो 15 अगस्त को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। ये देश हैं—दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, बहरीन, कांगो और लिकटेंस्टीन।

फैक्ट 4: गांधी जी जश्न में शामिल नहीं थे:

15 अगस्त 1947 को जब पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा था, तब महात्मा गांधी दिल्ली से दूर बंगाल के नोआखली में सांप्रदायिक दंगों को शांत करने के लिए अनशन पर बैठे थे।

फैक्ट 5: पहली बार तिरंगा फहराने की तारीख:

भारत का पहला तिरंगा झंडा 15 अगस्त को नहीं, बल्कि 7 अगस्त 1906 को ही कलकत्ता के पारसी बागान चौक पर फहरा दिया गया था, हालांकि उसका स्वरूप आज के तिरंगे से बिल्कुल अलग था।

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