मुरमी टोला, कनेरी रैयत और कछरा टोला के ग्रामीणों ने शुरू किया धरना, पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर फिर खोला आंदोलन का मोर्चा
शहपुरा- डिंडौरी जिले के मेंहदवानी-शहपुरा मार्ग पर पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्काजाम करने वाले ग्रामीणों का आंदोलन एक बार फिर शुरू हो गया है। पूर्व में करीब छह घंटे तक चक्काजाम करने के बाद प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम देने वाले मुरमी टोला, कनेरी रैयत और कछरा टोला के ग्रामीणों ने निर्धारित समय बीतने के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं होने पर अब एसडीएम कार्यालय शहपुरा के सामने धरना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि पूर्व में तीनों गांवों के ग्रामीणों ने पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर
मेंहदवानी-शहपुरा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया था। इस आंदोलन में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और स्कूली विद्यार्थी भी शामिल हुए थे। करीब छह घंटे तक चले चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी और आवागमन प्रभावित रहा था। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और बातचीत के बाद ग्रामीणों ने रास्ता खोल दिया था।
उस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 15 दिन के भीतर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल करने का अल्टीमेटम दिया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि निर्धारित समय में उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी मांग पूरी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई।
*बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित*
ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण उन्हें लंबे समय से आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। इसका खामियाजा ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भी भुगतना पड़ता है। सड़क के अभाव में दैनिक जरूरतों के लिए आवागमन करना भी चुनौती बना हुआ है।
*अल्टीमेटम के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी*
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले चक्काजाम समाप्त करते समय प्रशासन को 15 दिन का समय दिया था, लेकिन समय सीमा पूरी होने के बावजूद उनकी मांग पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। इसी के विरोध में अब ग्रामीण एसडीएम कार्यालय शहपुरा के सामने धरने पर बैठ गए हैं। अब सवाल यह है कि छह घंटे के चक्काजाम और 15 दिन के अल्टीमेटम के बाद भी सड़क की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पाया? क्या प्रशासन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पर ठोस पहल करेगा या फिर ग्रामीणों को अपनी मांग मनवाने के लिए दोबारा सड़क पर उतरना पड़ेगा?
रिपोर्ट लीलाराम साहू डिंडोरी



