दीपक तिवारी
बिहार के जहानाबाद में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़; 20 लाख की नकली दवाओं संग 50 लाख का माल जब्त, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
- जहानाबाद के हुलासगंज में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम की ताबड़तोड़ छापेमारी।
- मौके से लगभग 20 लाख रुपये बाजार मूल्य की नकली दवाएं बरामद।
- पैकेजिंग मटेरियल और अन्य उपकरणों सहित कुल 50 लाख रुपये का अवैध उत्पाद जब्त।
- सस्ती दवाओं के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले रैकेट की जांच में जुटी पुलिस।
बिहार के जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र से नकली दवाओं के काले कारोबार से जुड़ी एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग, ड्रग इंस्पेक्टर और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक अवैध ठिकाने पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस बड़ी कार्रवाई में टीम ने मौके से लगभग 20 लाख रुपये मूल्य की नकली दवाएं और भारी मात्रा में रैपर व पैकेजिंग मटेरियल सहित कुल 50 लाख रुपये से अधिक का अवैध उत्पाद जब्त किया है।
इस भंडाफोड़ के बाद से पूरे इलाके के दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा बाजारों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या चंद रुपयों के मुनाफे के लिए और सस्ती दवा के नाम पर मासूम मरीजों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है?



गुप्त सूचना पर टीम ने डाला डेरा, अवैध निर्माण का भंडाफोड़
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन को पिछले कुछ समय से हुलासगंज इलाके में नकली दवाओं के निर्माण और उनकी अवैध सप्लाई की गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं। सूचना की कड़ियों को जोड़ते हुए ड्रग इंस्पेक्टर और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने चिन्हित ठिकाने पर अचानक धावा बोल दिया।
निरीक्षण के दौरान वहां भारी मात्रा में नामी कंपनियों के नकली रैपर, खाली कैप्सूल, प्रतिबंधित और घटिया सॉल्ट बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल नकली जीवनरक्षक दवाएं बनाने में किया जा रहा था। पुलिस ने सभी सामग्रियों को सील कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए दवाओं के सैंपल को जांच के लिए सरकारी लैब में भेज दिया है।
सस्ती दवाओं का खेल: आपकी सेहत पर भारी
अधिकारियों का कहना है कि यह सिंडिकेट ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के मेडिकल स्टोरों को निशाना बनाता था, जहाँ लोग कम कीमत या भारी डिस्काउंट के लालच में आसानी से आ जाते हैं। ये नकली दवाएं न सिर्फ बीमारी को ठीक करने में बेअसर होती हैं, बल्कि इनमें इस्तेमाल होने वाले घटिया केमिकल मरीजों के लिवर, किडनी और जान के लिए सीधे तौर पर खतरा पैदा करते हैं।
नकली दवाओं के जाल से ऐसे बचें
वेबसाइट के पाठकों और आम जनता के लिए स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों ने कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं, ताकि कुछ रुपये बचाने की चाहत में लोग अपने परिवार की जान जोखिम में न डालें:
- भारी डिस्काउंट के झांसे में न आएं: सिर्फ ज्यादा छूट या आकर्षक ऑफर देखकर किसी भी अपरिचित या बिना लाइसेंस वाली दुकान से दवा खरीदने से बचें।
- ऑनलाइन खरीदारी में रहें सावधान: यदि आप ऑनलाइन मेडिसिन मंगवाते हैं, तो हमेशा प्रामाणिक, रजिस्टर्ड और सरकार द्वारा अधिकृत (Authorized) ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म का ही चयन करें।
- दवा का पक्का बिल जरूर लें: दवा खरीदते समय दुकानदार से कंप्यूटर जनित या पक्का बिल मांगें। बिल पर दवा का नाम, बैच नंबर (Batch Number), एमआरपी (MRP) और एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।
- पैकेजिंग और निर्माता की जांच: दवा के रैपर की प्रिंटिंग क्वालिटी, स्पेलिंग (Spelling), और निर्माता कंपनी के लोगो (Logo) को ध्यान से देखें। नकली दवाओं की पैकेजिंग में अक्सर बारीक गलतियां होती हैं।
- वैध पर्ची और डॉक्टर की सलाह: कोई भी दवा हमेशा डॉक्टर की वैध पर्ची (Prescription) के आधार पर ही लें और हमेशा एक विश्वसनीय, पुराने या रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से ही दवाएं खरीदें।


