Friday, October 23, 2026

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मुरैना न्यूज़: हाईवे पर...

मुरैना के NH-44 पर वाहन चेकिंग के दौरान पूर्व सेना जवान और वर्तमान पुलिस आरक्षक ओमप्रकाश तिवारी की वाहन से कुचलकर मौत हो गई। पुलिस ने 12 किलोमीटर पीछा कर आरोपी ड्राइवर को दबोचा। पूरी खबर पढ़ें।
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साय सरकार का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ के 2.59 लाख कॉलेज छात्रों को मिलेगा रूम रेंट, हर महीने बैंक खाते में आएंगे ₹3,000 तक

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की राह पकड़ने वाले आरक्षित वर्ग के होनहार युवाओं के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील निर्णय लिया है. प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में दाखिला लेने के बाद भी जिन जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को हॉस्टल (शासकीय पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास) में जगह नहीं मिल पाती थी, अब उनके ठहरने और पढ़ाई का खर्च सरकार उठाएगी. ‘मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना’ के तहत सरकार ऐसे विद्यार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में हर महीने ₹3,000 तक की कमरा किराया (रूम रेंट) सहायता राशि प्रदान करेगी.

इस कल्याणकारी पहल से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से शहरों में आकर पढ़ने वाले अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लगभग 2.59 लाख रेगुलर विद्यार्थियों को सीधा फायदा पहुंचेगा.

महंगे कमरों के खर्च से मिलेगी मुक्ति, संभागों के हिसाब से तय हुई राशि

अक्सर देखा जाता है कि प्रदेश के सुदूर वनांचलों और गांवों से बड़े शहरों या जिला मुख्यालयों में पढ़ने आने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को हॉस्टल में सीमित सीटें होने के कारण मायूस होना पड़ता था. इसके बाद उन्हें मजबूरी में निजी लॉज, पीजी (PG) या किराए के कमरों में भारी-भरकम पैसे खर्च कर रहना पड़ता था, जिससे कई बार आर्थिक तंगी के चलते होनहार छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे.

छात्रों की इसी बुनियादी समस्या को समझते हुए राज्य सरकार ने यह वित्तीय ढांचा तैयार किया है:

  • राजधानी रायपुर के लिए: रायपुर संभाग या मुख्यालय में रहकर पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ₹3,000 प्रति माह दिए जाएंगे.
  • अन्य संभागीय मुख्यालयों के लिए: बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा जैसे अन्य संभागीय मुख्यालयों में शिक्षा ले रहे छात्रों को ₹2,500 प्रति माह की सहायता मिलेगी.
  • भुगतान की अवधि: यह राशि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान 10 महीनों के लिए प्रदान की जाएगी, जो साल में तीन किस्तों के रूप में सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए छात्रों के खातों में पहुंचेगी.

पात्रता की शर्तें: सिर्फ मेधावी और जरूरतमंदों को ही मिलेगा लाभ

योजना का लाभ पूरी तरह पारदर्शिता के साथ सही हकदारों तक पहुंचाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं:

  1. शैक्षणिक निरंतरता और समय-सीमा: कोई भी छात्र इस योजना का लाभ अपनी ग्रेजुएशन (UG) की पढ़ाई के लिए अधिकतम 4 साल और पोस्ट-ग्रेजुएशन (PG) के लिए अधिकतम 2 साल यानी अपने पूरे करियर में कुल 6 वर्षों तक ही उठा सकता है.
  2. आय का दायरा: छात्र के माता-पिता या अभिभावक की समस्त स्रोतों से कुल वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए.
  3. मेरिट के आधार पर चयन: योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहतर होना जरूरी है. कॉलेज के प्रथम वर्ष (स्नातक) में प्रवेश के समय छात्र का 12वीं बोर्ड में प्रथम श्रेणी (First Division) से पास होना अनिवार्य है. वहीं, पीजी पाठ्यक्रमों के लिए स्नातक में कम से कम 55% अंक होने आवश्यक हैं.
  4. स्थानीय और नियमित छात्र: आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना और किसी भी शासकीय कॉलेज में नियमित (Regular) छात्र के रूप में नामांकित होना अनिवार्य है.

शिक्षा के स्तर में आएगा बड़ा सुधार

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के कुल 343 सरकारी कॉलेजों में पढ़ रहे 2.88 लाख छात्रों में से एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 90 फीसदी) सुरक्षित महसूस करेगा. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के धरातल पर उतरने से न केवल ड्रॉप-आउट रेट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या) में भारी कमी आएगी, बल्कि पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों के मेधावी छात्र भी बिना किसी मानसिक या आर्थिक तनाव के अपनी उच्च शिक्षा को पूरा कर देश-प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे.

विभाग द्वारा जल्द ही इसके लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल और विस्तृत दिशानिर्देशों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी.

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