नई दिल्ली / इंदौर:
बीमाधारकों के हितों की रक्षा और गलत तरीके से पॉलिसी बेचे जाने पर लगाम लगाने के लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नियामक ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है। नए नियमों के लागू होने के बाद एजेंटों और बैंकों को मिलने वाले भारी-भरकम कमीशन पर सख्त ऊपरी सीमा लगा दी जाएगी, जिससे ग्राहकों के प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा सीधे निवेश हो सकेगा।
मौजूदा व्यवस्था से ग्राहकों को नुकसान क्यों?
अक्सर देखा गया है कि जब कोई ग्राहक पारंपरिक लाइफ इंश्योरेंस या एंडोमेंट पॉलिसी खरीदता है, तो उसके पहले साल के प्रीमियम का 30 से 40 प्रतिशत तक का हिस्सा एजेंट या बैंक को कमीशन के रूप में चला जाता है। इसके कारण:
- कम निवेश: शुरुआत के वर्षों में ग्राहक का बेहद कम पैसा निवेश हो पाता है।
- कम रिफंड: यदि कोई पॉलिसीधारक शुरुआती दो-तीन वर्षों में पॉलिसी बंद करना चाहे, तो उसे ना के बराबर पैसा वापस मिलता है।
- गलत बिक्री: ज्यादा कमीशन के लालच में एजेंट अक्सर ग्राहकों को गलत या अनुपयुक्त पॉलिसियां बेच देते हैं।
प्रस्तावित बदलाव: अब अवधि के हिसाब से तय होगा कमीशन
नियामक ने पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान की अवधि के आधार पर कमीशन की नई सीमाएं तय करने का प्रस्ताव रखा है:
- 5 साल से कम की अवधि पर: पहले साल का अधिकतम कमीशन केवल 6.25 प्रतिशत तय होगा।
- 5 साल की अवधि पर: एजेंट को पहले साल अधिकतम 12.5 प्रतिशत कमीशन मिल सकेगा।
- 6 से 8 साल की अवधि पर: पहले साल का कमीशन अधिकतम 17.5 प्रतिशत तय किया गया है।
- 9 साल की अवधि पर: इस अवधि के लिए पहले साल का कमीशन अधिकतम 22.5 प्रतिशत होगा।
- 10 साल या उससे अधिक की अवधि पर: पहले साल का कमीशन अधिकतम 25 प्रतिशत तय होगा, जो पुरानी व्यवस्था में 35 से 40 प्रतिशत तक चला जाता था।
- हेल्थ इंश्योरेंस पर नया नियम: स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर नया कमीशन 20 प्रतिशत और उसके बाद हर साल रिन्यूअल कराने पर 10 प्रतिशत तय करने का प्रस्ताव है।
पॉलिसीधारकों को इससे क्या फायदे होंगे?
- ज्यादा निवेश और बेहतर रिटर्न: प्रीमियम से कमीशन की कटौती कम होने के कारण निवेश की मूल रकम बढ़ जाएगी। इससे ग्राहकों को मैच्योरिटी पर काफी ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
- सस्ते हो सकते हैं प्रीमियम: बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च में कमी आएगी। नियामक ने कंपनियों के कुल खर्च को घटाने का लक्ष्य रखा है, जिससे आने वाले समय में पॉलिसी प्रीमियम सस्ते हो सकते हैं।
- लोन के साथ जबरन इंश्योरेंस पर रोक: कई बार बैंक लोन देते समय ग्राहकों को जबरन इंश्योरेंस पॉलिसी थमा देते हैं। नए नियमों के तहत लोन के साथ इंश्योरेंस की अनिवार्य लिंकिंग पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है।
- सरेंडर वैल्यू में सुधार: ग्राहकों का पैसा पहले दिन से ज्यादा इन्वेस्ट होने के कारण पॉलिसी को बीच में बंद करने पर मिलने वाला रिफंड पहले के मुकाबले बेहतर होगा।
कब से लागू होंगे नियम?
IRDAI ने इस ड्राफ्ट पर सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। इन सुझावों की समीक्षा करने के बाद नियामक अंतिम नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसे एक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि बाजार पर अचानक दबाव न पड़े।


