भारत का बड़ा फैसला: पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए अब ‘वीजा’ अनिवार्य, गृह मंत्रालय ने जारी किए नए नियम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पड़ोसी देशों से भारत आने और यहां रहने वाले विदेशी नागरिकों के नियमों में एक बड़ा फेरबदल किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए 6 गैर-मुस्लिम समुदायों के शरणार्थियों के लिए अब वैध वीजा (Visa) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
इससे पहले इन नागरिकों को पासपोर्ट और वीजा दोनों की अनिवार्य शर्तों से पूरी तरह छूट मिली हुई थी। इमिग्रेशन और विदेशी (छूट) संशोधन आदेश के तहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही इन लोगों को बिना पासपोर्ट या बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश की रियायत बरकरार रहेगी, लेकिन भारत में आगे रहने (Continued Stay) के लिए इन्हें अनिवार्य रूप से संबंधित कैटेगरी का वीजा हासिल करना होगा।
नए बदलावों को समझने के लिए 5 मुख्य पॉइंट्स:
- 1. छह अल्पसंख्यक समुदायों पर लागू होगा नियम:
यह नया नियम पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों पर प्रभावी होगा। यह वे लोग हैं जो इन पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर की वजह से अपनी जान बचाकर भारत आए हैं। - 2. 31 दिसंबर 2024 की कट-ऑफ तारीख:
गृह मंत्रालय की इस गाइडलाइन के दायरे में वे गैर-मुस्लिम शरणार्थी आएंगे, जिन्होंने 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत की सीमा में प्रवेश किया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो बिना किसी वैध यात्रा दस्तावेज के भारत आए थे या फिर जिनके पासपोर्ट-वीजा की अवधि अब समाप्त (Expire) हो चुकी है। - 3. पहले से दी गई छूट में क्या बदला?:
इससे पहले सितंबर 2015 में जारी एक आदेश के जरिए इन 6 समुदायों को पासपोर्ट और वीजा की शर्तों से पूरी छूट दी गई थी, ताकि वे कानूनी कार्रवाई से बच सकें। सरकार ने नए संशोधन में बिना पासपोर्ट प्रवेश की छूट को तो बरकरार रखा है, लेकिन देश में लंबे समय तक बने रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा (Appropriate Category of Visa) लेना जरूरी कर दिया है। - 4. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जुड़ाव:
सरकार का यह कदम नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के कानूनी ढांचे को व्यवस्थित करने की दिशा में है। सीएए के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले आए अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता का प्रावधान है, जबकि इस नए नियम से 2014 के बाद और 2024 के अंत तक आए प्रवासियों को भी भारत में रहने का एक वैध कानूनी आधार (Visa के जरिए) मिल सकेगा। - 5. नेपाल और भूटान रूट पर भी बढ़ी सख्ती:
गृह मंत्रालय ने इस अधिसूचना में केवल तीन देशों के प्रवासियों पर ही नहीं, बल्कि नेपाल और भूटान सीमाओं से होने वाली आवाजाही पर भी शिकंजा कसा है। भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए अब सीमा पार करने के नियमों को और अधिक स्पष्ट किया गया है ताकि security व्यवस्था को मजबूत रखा जा सके।


