Friday, November 6, 2026

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जम्मू-कश्मीर में उमर सरकार पर मंडराया संकट: 25 विधायकों का अल्टीमेटम, आज ही दे सकते हैं इस्तीफा!

जम्मू-कश्मीर की सियासत में इस समय सबसे बड़ा भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर गिरने का गंभीर संकट मंडरा रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और सहयोगी दलों के करीब 25 असंतुष्ट विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे दी है। श्रीनगर में आज नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में इन नाराज विधायकों के साथ ‘आखिरी और निर्णायक’ बैठक होने जा रही है। यदि इस बैठक में विधायकों की मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आज ही अपनी विधायकी से इस्तीफा दे सकते हैं।

क्या हैं नाराज विधायकों की मांगें?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधायकों की नाराजगी की मुख्य वजह हाल ही में हुआ कैबिनेट विस्तार और फेरबदल है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। नाराज गुट ने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं:

  • कैबिनेट को बर्खास्त करना: मौजूदा मंत्रिमंडल को पूरी तरह भंग कर नए सिरे से, वरिष्ठता और पारदर्शिता के आधार पर मंत्रियों का चयन किया जाए।
  • सलाहकारों को हटाना: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के करीबी सलाहकारों को तुरंत उनके पदों से हटाया जाए।
  • चुनावी वादों पर सख्त रुख: चुनावी घोषणापत्र में जनता से किए गए वादों, विशेष रूप से राज्य के दर्जे (Statehood) की मांग को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से उठाया जाए।

सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी का इस्तीफा और बढ़ता दबाव

इस सियासी बगावत को तब और हवा मिल गई, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के सबसे मुखर चेहरे और श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने पार्टी और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उमर सरकार पर चुनावी वादों से मुकर जाने का खुला आरोप लगाया है। इसके साथ ही कई वरिष्ठ विधायकों के समर्थकों ने भी उन्हें कैबिनेट में जगह न मिलने पर श्रीनगर की सड़कों पर भारी प्रदर्शन किया है।

समझें सीटों का गणित: कैसे गिर सकती है उमर सरकार?

जम्मू-कश्मीर की 95 सदस्यीय विधानसभा (90 निर्वाचित + 5 मनोनीत) में बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है।

  • मौजूदा स्थिति: उमर अब्दुल्ला सरकार के पास कुल 54 विधायकों का समर्थन है, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41, कांग्रेस के 6, और कुछ निर्दलीय व वामपंथी विधायक शामिल हैं।
  • खतरे का कारण: यदि बगावत पर उतरे 25 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देते हैं, तो सदन की प्रभावी संख्या घटकर 70 रह जाएगी और बहुमत का नया आंकड़ा 36 हो जाएगा। ऐसे में सत्ताधारी गठबंधन के पास केवल 28 से 29 विधायक बचेंगे, जिससे उमर सरकार तुरंत अल्पमत में आकर गिर जाएगी।

इस निर्णायक मोड़ पर आज श्रीनगर में होने वाली बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, जो जम्मू-कश्मीर की नई सरकार का भविष्य तय करेगी।

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