ललतारौ पुल पर अतिक्रमण पर निगम की आधी-अधूरी कार्रवाई, सवालों के घेरे में नगर निगम
पक्की दुकानों पर चला बुलडोजर, हवा में लटके खोखों पर मेहरबानी क्यों?
अर्जुन धारीवाल
हरिद्वार। ललतारौ पुल के आसपास अतिक्रमण को लेकर नगर निगम की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शनिवार को नगर निगम की टीम ललतारौ पुल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची और सड़क किनारे बनी पक्की दुकानों के बाहर किए गए अतिक्रमण को हटाया गया।
लेकिन कार्रवाई के दौरान निगम की टीम ने उसी क्षेत्र में सड़क तक निकले और कथित तौर पर हवा में लटके खोखों को अनदेखा कर दिया, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह भी पढ़िए
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का दौरा, तीखे सवालों के बाद मांगी माफी
सूत्रों के अनुसार पुल के आसपास कुछ दुकानें इस तरह बनाई गई हैं कि उनका एक हिस्सा सड़क की ओर निकला हुआ है, जबकि दूसरा हिस्सा हवा में लटका दिखाई देता है। ऐसे निर्माणों से न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अग्निकांड के बाद भी नहीं चेता निगम
गौरतलब है कि बीते दिनों ललतारौ पुल क्षेत्र में भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें करीब चार से पांच दुकानें जलकर राख हो गई थीं। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और अतिक्रमण को लेकर सवाल उठे थे। इसके बावजूद अब हुई कार्रवाई में केवल पक्की दुकानों को ही निशाना बनाए जाने से नगर निगम की नीति पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल – दोहरी कार्रवाई क्यों?
सवाल यह है कि जब नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने मौके पर पहुंची ही थी, तो सड़क की ओर निकले और हवा में लटके खोखों को कार्रवाई के दायरे में क्यों नहीं लिया गया? क्या निगम की टीम को ऐसे खोखे दिखाई नहीं दिए, या फिर इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
ललतारौ पुल जैसे व्यस्ततम क्षेत्र में सड़क के आसपास बने ऐसे ढांचे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। विशेष रूप से पूर्व में हो चुके अग्निकांड के बाद इस तरह के निर्माणों की सुरक्षा जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से क्यों नहीं की जा रही? यदि सड़क पर निकला निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आता है, तो सभी ऐसे निर्माणों पर एक समान कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि कुछ खोखों को नियमों के तहत अनुमति मिली हुई है, तो नगर निगम को इसकी स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए।
कार्रवाई के दौरान पक्की दुकानों पर निगम की टीम की मौजूदगी साफ दिखाई दी, लेकिन हवा में लटके बताए जा रहे खोखों पर कार्रवाई न होने से कई सवाल अनुत्तरित हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम इन ढांचों की जांच कब करता है और क्या इनके खिलाफ भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल ललतारौ पुल क्षेत्र में चल रही कार्रवाई ने अतिक्रमण हटाने की नगर निगम की नीति और उसकी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


