पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कई महीनों से सुलग रही असंतोष की आग अब एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। इस्लामाबाद के सौतेले व्यवहार, बेतहाशा महंगाई और बुनियादी अधिकारों के हनन से तंग आकर अब PoK की जनता ने सीधे तौर पर नियंत्रण रेखा (LoC) को खत्म करने और भारत के साथ विलय करने की मांग बुलंद कर दी है।
ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, नियंत्रण रेखा (LoC) के बेहद करीब स्थित मंढोल इलाके में एक ऐतिहासिक और विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लेकर पाकिस्तानी सेना और हुकूमत के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
‘खत्म करो LoC, खोलो भारत के रास्ते’
इस जनांदोलन की अगुवाई कर रहे स्थानीय सामाजिक नेताओं ने खुले मंच से पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीतियों को सीधी चुनौती दी। उन्होंने जनसभा के सामने खुले तौर पर प्रस्ताव रखा कि यदि पाकिस्तानी हुकूमत उन्हें उनका हक नहीं दे सकती, तो पुंछ-मेंढर के पारंपरिक रास्तों पर लगी बाड़ को तोड़कर उन्हें भारत (जम्मू-कश्मीर) की तरफ मार्च करने की अनुमति दी जाए।
मंच के सामने मौजूद हजारों लोगों की भीड़ ने एक सुर में हाथ उठाकर और नारों के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे अब पाकिस्तान की भुखमरी और तानाशाही का शिकार नहीं होना चाहते और वे अपने मूल देश भारत के साथ जाना पसंद करेंगे।
पाक सेना की बर्बरता पर भारी पड़ी आवाम की जिद
इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और रेंजरों ने मुज़फ्फराबाद, मीरपुर और अन्य इलाकों में जमकर बल प्रयोग किया है। अंधाधुंध लाठीचार्ज, आंसू गैस और इंटरनेट पर पाबंदी लगाने के बावजूद युवाओं और महिलाओं का हौसला कम नहीं हुआ है। स्थानीय लोग अब खुलेआम पाकिस्तानी सैन्य चौकियों के सामने खड़े होकर सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने की चेतावनी दे रहे हैं।
भारतीय सीमा पर सेना हाई अलर्ट पर
PoK में मचे इस आंतरिक घमासान और नियंत्रण रेखा (LoC) की तरफ मार्च करने की चेतावनियों के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और भारतीय सेना बेहद सतर्क हैं। ख़ुफ़िया इनपुट्स के अनुसार, इस जनांदोलन से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी एजेंसी सीमा पर किसी बड़ी साजिश या घुसपैठ को अंजाम दे सकती है। इसके मद्देनजर पुंछ, राजौरी और कुपवाड़ा सेक्टरों में LoC पर सुरक्षा घेरा और पेट्रोलिंग को बेहद सख्त कर दिया गया है। भारत की तरफ से हमेशा की तरह यह रुख स्पष्ट है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अटूट हिस्सा है।


