Tuesday, September 22, 2026

TOP NEWS

शाहजहांपुर: श्मशान में इंसानियत...

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में श्मशान घाट पर बुजुर्ग की जलती चिता की आग पर मीट पकाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पूरी खबर पढ़ें।

डोल ग्यारस पर गंज...

डोल ग्यारस पर गंज बासौदा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब: सर्व समाज ने...

‘चाय में बेहोशी की...

प्यार के पागलपन में अपने ही परिवार के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काटने वाली शबनम की खौफनाक दास्तान। जानिए पुलिस तफ्तीश की वो इनसाइड स्टोरी जिसने खोला पूरा राज।

UPI का फ्री दौर...

UPI पर मुफ्त का दौर खत्म! 15 अक्टूबर से ₹2000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगेगा मर्चेंट चार्ज। PhonePe और Google Pay की होगी अरबों डॉलर की बंपर कमाई। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
HomecrimexCRIMEX:खूनी आशिकी और सियासत का वो खौफनाक 'शतरंज', जब 8 बार के...

CRIMEX:खूनी आशिकी और सियासत का वो खौफनाक ‘शतरंज’, जब 8 बार के नेशनल चैंपियन सैय्यद मोदी को सरेआम गोलियों से भून दिया गया!

28 जुलाई 1988 की शाम को लखनऊ के के.डी. सिंह बाबू स्टेडियम के बाहर जो कुछ भी हुआ, उसने न सिर्फ भारतीय खेल जगत को बल्कि देश की सियासत को भी हिलाकर रख दिया। 8 बार के नेशनल बैडमिंटन चैंपियन और देश के सबसे बड़े खेल सितारे सैय्यद मोदी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की तफ्तीश जब शुरू हुई, तो एक ऐसा खूनी सच सामने आया जिसमें खेल, शादी, नाजायज रिश्ते और सियासत का एक बेहद खतरनाक कॉकटेल छिपा था। शुरुआती गोलीबारी से लेकर सीबीआई (CBI) की फाइलों और आखिरी अदालती फैसले तक, पढ़िए इस केस की शुरुआत से अंत तक की पूरी इनसाइड स्टोरी।

वारदात: स्टेडियम का वो खूनी गेट

तारीख थी 28 जुलाई 1988। लखनऊ का के.डी. सिंह बाबू स्टेडियम हमेशा की तरह गुलजार था। शाम के करीब 7:50 बज रहे थे। सैय्यद मोदी अपनी रोजाना की प्रैक्टिस खत्म करके बैडमिंटन कोर्ट से बाहर निकले। उन्होंने स्टेडियम के गेट पर अपनी स्कूटर खड़ी की थी। वह जैसे ही किक मारकर जाने वाले थे, तभी अचानक एक सफेद रंग की मारुति वैन उनके पास आकर रुकी। वैन का दरवाजा खुला और दो नकाबपोश शूटर बाहर निकले। इससे पहले कि मोदी कुछ समझ पाते, हमलावरों ने अपनी 38 बोर की रिवॉल्वर और पिस्तौल से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। 5 गोलियां सैय्यद मोदी के जिस्म के पार हो गईं। वह खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़े। हमलावर तुरंत वैन में बैठे और रफूचक्कर हो गए। देश के एक महान खिलाड़ी ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।

पुलिस तफ्तीश: वो सफेद मारुति वैन और पहली लीड

हत्या की खबर मिलते ही लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश प्रशासन में हड़कंप मच गया। देश के इतने बड़े खिलाड़ी की हत्या सूबे की कानून व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा तमाचा थी। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की। कुछ लोगों ने उस सफेद मारुति कार का आंशिक नंबर (Partial Number) नोट कर लिया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने केस के चौथे ही दिन जांच देश की सबसे बड़ी एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंप दी।

CBI ने जब उस सफेद मारुति वैन की तलाश शुरू की, तो कड़ियां जुड़नी शुरू हुईं। यह वैन उत्तर प्रदेश के एक लोकल क्रिमिनल अखिलेश सिंह की निकली। अखिलेश सिंह के जरिए सीबीआई ने उस शूटर को दबोचा जिसने गोली चलाई थी— उसका नाम था भगवती सिंह उर्फ पप्पू। इसके साथ ही अमर बहादुर सिंह और जितेंद्र सिंह नामक आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। शूटरों की गिरफ्तारी से पुलिस को यह तो पता चल गया कि कत्ल किसने किया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी था— आखिर कत्ल किसने करवाया और क्यों?

डायरी का पन्ना और खूनी लव ट्रायंगल का खुलासा

जब सीबीआई ने कत्ल की वजह ढूंढने के लिए सैय्यद मोदी के घर की तलाशी ली, तो उनके हाथ लगी सैय्यद मोदी की पत्नी अमीता मोदी की एक पर्सनल डायरी। इस डायरी के पन्नों ने इस केस का रुख पूरी तरह से बदल दिया। सैय्यद मोदी और अमीता की शादी साल 1985 में हुई थी। दोनों ही बैडमिंटन के स्टार खिलाड़ी थे, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच कड़वाहट आ गई थी। डायरी से खुलासा हुआ कि अमीता के संबंध उस समय के बेहद रसूखदार, रईस और देश के कद्दावर राजनेता संजय सिंह से थे। संजय सिंह उस दौर में गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते थे और बाद में वी.पी. सिंह के साथ चले गए थे। सीबीआई की थ्योरी के मुताबिक, सैय्यद मोदी को अपनी पत्नी और संजय सिंह के इस रिश्ते के बारे में पता चल गया था। घर में रोज-रोज झगड़े हो रहे थे। मोदी इस रिश्ते के आड़े आ रहे थे, इसलिए उन्हें रास्ते से हटाने के लिए संजय सिंह और अमीता ने मिलकर एक खूनी साजिश रची। संजय सिंह ने अपने राजनीतिक गुर्गे अखिलेश सिंह को काम सौंपा और अखिलेश ने शूटरों को सुपारी देकर सैय्यद मोदी को रास्ते से हटवा दिया।

हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां और राजनीतिक भूचाल

20 अगस्त 1988 को सीबीआई ने जब चार्जशीट दाखिल की, तो उसमें देश के बड़े नेता संजय सिंह और सैय्यद मोदी की पत्नी अमीता मोदी को मुख्य साजिशकर्ता (Conspirators) के रूप में नामजद किया। संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी उस दौर की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर बन गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते संजय सिंह को फंसा रही है, जबकि सीबीआई का दावा था कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं।

अंजाम: जब कोर्ट में बिखर गई सीबीआई की कहानी

यह मामला जब कोर्ट पहुंचा, तो देश के सबसे महंगे और नामी वकीलों की फौज संजय सिंह और अमीता को बचाने के लिए मैदान में उतर गई। ट्रायल कोर्ट में सीबीआई यह साबित करने में नाकाम रही कि संजय सिंह या अमीता का शूटरों से कोई सीधा संबंध था या उन्होंने सीधे तौर पर मर्डर की सुपारी दी थी। साल 1990 में, कोर्ट ने सबूतों के अभाव में ट्रायल शुरू होने से पहले ही संजय सिंह और अमीता मोदी को पूरी तरह बरी कर दिया। बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। बरी होने के कुछ समय बाद संजय सिंह और अमीता मोदी ने आपस में शादी कर ली और अमीता ‘अमीता सिंह’ बन गईं।

मुख्य साजिशकर्ता तो साफ बच निकले, लेकिन इस केस के अहम मोहरे कानून के शिकंजे से नहीं बच पाए। केस के एक आरोपी अमर बहादुर सिंह की कोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। अखिलेश सिंह को भी राहत मिल गई। वारदात के पूरे 21 साल बाद, साल 2009 में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने इकलौते बचे शूटर भगवती सिंह उर्फ पप्पू को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई


सैय्यद मोदी हत्याकांड भारत के क्रिमिनल इतिहास का एक ऐसा पन्ना है जहां मोहरे (शूटर) को तो सजा मिल गई, लेकिन कत्ल के पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन था, यह राज हमेशा-अधूरी तफ्तीश और कानूनी दांवपेच की फाइलों में दफन होकर रह गया।


RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments