हरियाली अमावस्या: सुख-समृद्धि और भगवान शिव की कृपा के लिए जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा
सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या को ‘हरियाली अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन प्रकृति अपने पूर्ण सौंदर्य पर होती है, इसलिए पौधे लगाने और व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व है।
हरियाली अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा
प्राचीनकाल में एक प्रतापी राजा के पास एक विशाल और सुंदर महल था। उस महल में एक ब्राह्मण परिवार भी रहता था। राजा का एक छोटा पुत्र था और ब्राह्मण की एक पुत्री थी। दोनों में बहुत अच्छी मित्रता थी।
एक दिन राजा के पुत्र ने चोरी छिपे महल के बगीचे में लगा एक फल तोड़कर खा लिया। जब राजा को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपने सेवकों को चोर का पता लगाने को कहा। राजा के कोप से अपने मित्र को बचाने के लिए ब्राह्मण की पुत्री ने चोरी का इल्जाम अपने सर ले लिया। इसके परिणामस्वरूप राजा ने उस लड़की को राज्य से बाहर निकाल दिया।
दुखी होकर लड़की जंगल में चली गई। सावन मास की अमावस्या का दिन था। उसने जंगल में मिट्टी का शिवलिंग बनाया और भगवान शिव तथा माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा-अर्चना की। उसने दिनभर निर्जला उपवास रखा और भगवान शिव से अपने परिवार तथा मित्र के कल्याण की प्रार्थना की।
लड़की की निश्छल भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर माता पार्वती और भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए। भोलेनाथ ने उसे अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का वरदान दिया। साथ ही, राजा को भी स्वप्न में लड़की की निर्दोषता और उसके त्याग का बोध कराया।
अगले दिन राजा ने पूरे सम्मान के साथ उस लड़की को वापस महल बुलवाया और अपने पुत्र का विवाह उसके साथ करवा दिया। तभी से हरियाली अमावस्या के दिन इस व्रत कथा को पढ़ने और सुनने की परंपरा चली आ रही है।
पूजा का महत्व
शिव कृपा: इस कथा के पठन और श्रवण से भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण: इस दिन एक पौधा लगाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
हरियाली अमावस्या: सुख-समृद्धि और भगवान शिव की कृपा के लिए जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा
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