उज्जैन में महाचमत्कार! ‘खड़े हनुमान जी’ की प्रतिमा के पास जाते ही फेल हुए हाईटेक स्कैनर, आधी रात को भोपाल से आई तकनीकी टीम लौटी खाली हाथ
धर्मनगरी उज्जैन से विज्ञान और आस्था के बीच एक नया और हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है, जिसने आधुनिक तकनीक को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। सती गेट स्थित प्राचीन ‘खड़े हनुमान जी’ की प्रतिमा की जमीनी गहराई और संरचना का पता लगाने पहुँची भोपाल की एक्सपर्ट टीम की अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीनें मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही अचानक ठप हो गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, उपकरणों को जैसे ही प्रतिमा के मुख्य हिस्सों के करीब ले जाया गया, उनकी बैटरियां रहस्यमयी तरीके से शून्य (0%) हो गईं, जिसके बाद टीम को आधी रात को ही बैरंग लौटना पड़ा।
स्थानीय श्रद्धालु और हिंदू संगठन इसे बाबा बजरंगबली का साक्षात चमत्कार और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट ईश्वरीय संकेत मान रहे हैं।
रात 12:30 बजे बिना सूचना पहुँची थी 8 सदस्यीय टेक्निकल टीम
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशों पर भोपाल से विशेष तौर पर बुलाई गई 8 सदस्यीय पुरातत्व व तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे गुपचुप तरीके से मंदिर स्थल पर पहुँची। टीम अपने साथ ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और इंडस्ट्रियल सिटी स्कैनिंग जैसे करोड़ों रुपये के अत्याधुनिक डिजिटल उपकरण लेकर आई थी, ताकि प्रतिमा के निचले हिस्से का पूरा डेटा और उसकी गहराई का सटीक नक्शा निकाला जा सके।
प्रतिमा को छूते ही उपकरण पड़े ठंडे, डेढ़ घंटे की मशक्कत रही नाकाम
विशेषज्ञों ने जैसे ही प्रतिमा की नींव का डेटा लेने के लिए हाई-टेक स्कैनिंग सेंसर ऑन किए, अचानक मशीनों की स्क्रीन बंद हो गई और सिग्नल गायब हो गए। तकनीकी स्टाफ ने जब उपकरणों की जांच की, तो पूरी तरह चार्ज करके लाई गई बड़ी बैटरियां अचानक पूरी तरह डिस्चार्ज दिखा रही थीं। टीम ने तुरंत बैकअप पावर सिस्टम और अतिरिक्त बैटरियां लगाईं, लेकिन रहस्यमयी तकनीकी खराबी के चलते कोई भी मशीन दोबारा चालू नहीं हो सकी। आखिरकार करीब डेढ़ घंटे की असफल माथापच्ची के बाद, रात 2 बजे टीम को अपनी जांच अधूरी छोड़कर वापस जाना पड़ा।
‘रात के अंधेरे में क्यों हुई कार्रवाई?’ – हिंदू संगठनों और पार्षदों में भारी आक्रोश
इस गुप्त रात कालीन कार्रवाई की भनक लगते ही मौके पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और स्थानीय भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी पहुँच गए। जनप्रतिनिधियों ने रात के सन्नाटे में बिना किसी पूर्व सूचना के की गई इस जांच पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई और प्रशासन पर ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल खेलने का आरोप लगाया। श्रद्धालुओं का स्पष्ट कहना है कि मशीनों का इस तरह अचानक फेल होना भगवान का साक्षात इशारा है कि वे अपने मूल स्थान से नहीं हिलना चाहते। अब जनता और स्थानीय संगठनों ने मांग तेज कर दी है कि इस जांच को तुरंत बंद कर प्रतिमा स्थल पर ही भव्य मंदिर का निर्माण किया जाए।


