Sunday, November 1, 2026

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खुद को बताया MP का CM और दे दिया इस्तीफा! बालाघाट बच्चों की मौत मामले में एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके का अनोखा विरोध

भोपाल/बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की प्रशासनिक विफलता को उजागर करने के लिए सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक अनोखा और बेहद तीखा तंज कसा है। दिपके ने सोशल मीडिया पर खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए अपने पद से ‘इस्तीफा’ दे दिया है, जिसका पत्र इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस्तीफा पत्र में लिखा- ‘अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही’

अभिजीत दिपके ने राज्यपाल के नाम लिखे अपने इस प्रतीकात्मक (व्यंग्यात्मक) इस्तीफे में व्यवस्था पर करारी चोट की है। उन्होंने लिखा, “बालाघाट में 30 से ज्यादा मासूम आदिवासी बच्चों की जान जाने के बाद मेरी अंतरात्मा मुझे इस कुर्सी पर बने रहने की इजाजत नहीं देती। मुख्यमंत्री होने के नाते मैं उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया न करा पाने की पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं। मैं माननीय प्रधानमंत्री का भी आभार जताता हूं जिन्होंने मुझे राज्य की सेवा का मौका दिया, जिसमें मैं पूरी तरह विफल रहा।”

ग्राउंड जीरो पर हुआ था विवाद

यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब अभिजीत दिपके जमीनी हकीकत जानने के लिए बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों के दौरे पर पहुंचे थे। वहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान कुछ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उन्हें घेर लिया। दिपके पर इस दुखद घटना का राजनीतिकरण करने के आरोप लगाए गए।

इस तीखी बहस के बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कहा कि जब मुख्यधारा का मीडिया और प्रशासन इस त्रासदी पर मौन है, तब सवाल उठाने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है। इसी विरोध के स्वरूप उन्होंने यह व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र जारी किया।

सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल

बालाघाट में हुई इन मौतों ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लचर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार सरकार से इस मामले में जवाबदेही तय करने और डॉक्टरों व दवाओं की कमी को दूर करने की मांग कर रहे हैं। अभिजीत दिपके का यह अनोखा विरोध अब सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।


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