सरदारपुर
सरदारपुर से दशरथ पाटीदार
दसई-बामनखेड़ी तालाब से पानी निकाले जाने पर बड़ा सवाल: 400 से 500 गोवंश की प्यास कौन बुझाएगा?
जल संकट की आहट के बीच मोटर लगाकर पानी निकासी, गौशाला संचालकों और ग्रामीणों में चिंता
किसानों का दावा – “पटवारी निकिता मैडम के निर्देश पर लगाई मोटर, रसीद का भुगतान भी किया”
दसई, जिला धार। धार जिले में इस वर्ष कम वर्षा के कारण संभावित जल संकट को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर द्वारा सभी जल स्रोतों को संरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सरदारपुर तहसील के दसई-बामनखेड़ी तालाब से मोटर लगाकर बड़े पैमाने पर पानी निकाले जाने का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की तैयारियों पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
गोवंश के सामने पेयजल का संकट
स्थानीय लोगों के अनुसार इस तालाब पर दसई-बामनखेड़ी सहित आसपास के क्षेत्र के 400 से 500 गोवंश की पेयजल व्यवस्था निर्भर है। साथ ही यह तालाब क्षेत्र का भू-जल स्तर बनाए रखने का प्रमुख स्रोत भी है। यदि इसी तरह पानी निकाला जाता रहा तो आने वाले 2-3 महीनों में तालाब सूखने की कगार पर आ जाएगा और बेजुबान गोवंश के सामने प्यास से दम तोड़ने की नौबत आ सकती है।
किसानों ने क्या कहा?
मौके पर पानी निकाल रहे किसानों से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि “हमने जल संसाधन विभाग की पटवारी निकिता मैडम के निर्देश पर मोटर लगाई है। हमने विभाग में पैसे जमा किए हैं, हमें रसीद भी दी जाएगी।”
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जल संसाधन विभाग ने तालाब का वर्तमान जलस्तर, गोवंश की जरूरत और भविष्य के जल संकट का आकलन किए बिना ही पानी बेचने की अनुमति दे दी है?
उठते हैं ये गंभीर सवाल –
- कम बारिश के इस साल में तालाब से पानी निकालने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
- क्या अनुमति देते समय गौशाला और गोवंश के लिए पानी आरक्षित रखा गया?
- क्या विभाग के पास पानी निकालने का कोई लिखित आदेश और रसीद है?
- यदि तालाब खाली होता है तो इसकी जवाबदारी किसकी होगी?
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों और गौ-सेवकों ने जिला कलेक्टर धार एवं कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच की जाए और जब तक जांच पूरी न हो, तालाब से पानी निकालने पर रोक लगाई जाए। साथ ही तालाब को गोवंश के लिए संरक्षित किया जाए।


